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Rishikesh News: वन्यजीवों से फसल बचाएगी दुनिया की सबसे तीखी मिर्च
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sun, 17 May 2026 02:49 AM IST
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ग्राम खदरी खड़क माफ श्यामपुर के खलियान कुंज में नागालैंड की विश्व प्रसिद्ध भूत झोलकिया मिर्च की खेती के लिए बीज बोए गए। इसकी खेती करने से वन्यजीवों से फसल की सुरक्षा होगी।
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान विभाग के निदेशक डॉ. संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में हिल एग्रीकल्चर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। विशेषज्ञों के निर्देशन में बोए गए बीजों की समय-समय पर तकनीकी देखभाल की जाएगी। सफल उत्पादन के बाद किसानों के लिए उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे।
एसोसिएट प्रो. ललित भट्ट ने बताया कि भूत झोलकिया मिर्च की खासियत इसका अत्यधिक तीखापन है, जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। इसे न वन्यजीव खाते हैं और न ही कीट नुकसान पहुंचाते हैं। सामान्य मिर्च से कई गुना ज्यादा तीखी इस मिर्च का इस्तेमाल भारत और विदेशों में आंसू गैस व आतंकवादी निरोधक बम बनाने में भी होता है। इसकी बाजार में भारी मांग है।
पर्यावरणविद विनोद जुगलान ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक विकास के लिए कृषि नवाचारों पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी फसलों की ओर बढ़ना होगा जिन्हें वन्यजीव नुकसान न पहुंचा सके। केवल वन्यजीवों को फसल नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराने से समस्या हल नहीं होगी।
किसानों के साथ नीति-निर्माताओं को ऐसी फसलों का मसौदा तैयार करना होगा जिन्हें वन्यजीव क्षतिग्रस्त न करें। राज्य की आर्थिकी के लिए लीक से हटकर काम और नवाचारों को प्रोत्साहित करना जरूरी है। उन्होंने जीबी पंत विवि के कुलपति प्रो. शिवेंद्र कुमार कश्यप का आभार जताते हुए कहा कि ऐसे नवाचार राज्य के आर्थिक विकास को दिशा देंगे और रिवर्स माइग्रेशन को मजबूती मिलेगी। इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र कुमार सिंह, पर्यावरण प्रेमी अखिल भंडारी आदि मौजूद रहे।
गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान विभाग के निदेशक डॉ. संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में हिल एग्रीकल्चर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। विशेषज्ञों के निर्देशन में बोए गए बीजों की समय-समय पर तकनीकी देखभाल की जाएगी। सफल उत्पादन के बाद किसानों के लिए उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे।
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एसोसिएट प्रो. ललित भट्ट ने बताया कि भूत झोलकिया मिर्च की खासियत इसका अत्यधिक तीखापन है, जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। इसे न वन्यजीव खाते हैं और न ही कीट नुकसान पहुंचाते हैं। सामान्य मिर्च से कई गुना ज्यादा तीखी इस मिर्च का इस्तेमाल भारत और विदेशों में आंसू गैस व आतंकवादी निरोधक बम बनाने में भी होता है। इसकी बाजार में भारी मांग है।
पर्यावरणविद विनोद जुगलान ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक विकास के लिए कृषि नवाचारों पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी फसलों की ओर बढ़ना होगा जिन्हें वन्यजीव नुकसान न पहुंचा सके। केवल वन्यजीवों को फसल नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराने से समस्या हल नहीं होगी।
किसानों के साथ नीति-निर्माताओं को ऐसी फसलों का मसौदा तैयार करना होगा जिन्हें वन्यजीव क्षतिग्रस्त न करें। राज्य की आर्थिकी के लिए लीक से हटकर काम और नवाचारों को प्रोत्साहित करना जरूरी है। उन्होंने जीबी पंत विवि के कुलपति प्रो. शिवेंद्र कुमार कश्यप का आभार जताते हुए कहा कि ऐसे नवाचार राज्य के आर्थिक विकास को दिशा देंगे और रिवर्स माइग्रेशन को मजबूती मिलेगी। इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र कुमार सिंह, पर्यावरण प्रेमी अखिल भंडारी आदि मौजूद रहे।