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Rishikesh News: विदा होकर भी तीन जिंदगियों में अमर हुई निधि

संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Updated Sat, 02 May 2026 02:37 AM IST
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Even after leaving, Nidhi became immortal in three lives.
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मृत्यु अंत नहीं, एक नई शुरुआत भी हो सकती है। इस सत्य को आलमपुर बिजनौर की निधि (23) ने चरितार्थ किया है। निधि ने दुनिया से जाते-जाते तीन लोगों को नई जिंदगी दी है। यह घटना न केवल भावुक कर देने वाली है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी बन गई है।



बीते 21 अप्रैल को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल निधि को उपचार के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था। करीब दस दिनों तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद बीते बृहस्पतिवार को चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
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यह खबर परिजनों के लिए असहनीय थी, लेकिन उन्होंने एक ऐसा निर्णय लिया जिसने दुख को मानवता की मिसाल में बदल दिया। चिकित्सकों ने निधि के परिजनों और पति को अंगदान के लिए प्रेरित किया। परिजनों और पति की सहमति के बाद निधि की दोनों किडनी और लिवर जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित किए गए। इससे तीन लोगों को नया जीवन मिल सका।



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ब्रेन डेड से मरीज को मिला लिवर

लिवर की बीमारी से जूझ रहे एक व्यक्ति को एम्स में पहली बार लिवर ट्रांसप्लांट कर नया जीवन दिया गया। कैडेवर डोनर (ब्रेन डेड) से मरीज को लिवर मिला। रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन ने अक्तूबर 2023 में एम्स को लिवर ट्रांसप्लांट की अनुमति दे दी थी। तब से यहां इस सुविधा के शुरू होने का इंतजार किया जा रहा था। अब ढाई साल बाद एम्स में एक मरीज का लिवर प्रत्यारोपण कर इस जीवन रक्षक सुविधा को शुरू किया गया है। एम्स लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा वाला उत्तराखंड का पहला संस्थान है।



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एम्स में पहली बार कैडेवर डोनर से किडनी ट्रांसप्लांट भी



रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन ने आठ जनवरी 2021 को किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति एम्स को दी थी। तब से अब तक एम्स में 23 मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की जा चुकी हैं। 10 मई 2023 को एम्स में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। यह सभी किडनियां मरीजों को जीवित दाताओं (परिजनों) ने दी थी। बीते 30 अप्रैल को एम्स में पहली बार कैडेवर डोनर (ब्रेन डेड डोनर) से किडनी ट्रांसप्लांट की गई है।

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एक ही ओटी कॉम्प्लेक्स में हुए दो मरीजों के अंग प्रत्यारोपित



बीते बृहस्पतिवार की रात करीब 9 बजे अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया शुरू की गई जो कि लगभग 13 घंटे यानि शुक्रवार सुबह 10 बजे तक चली। जिसमें एम्स के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने हिस्सा लिया। इस कार्य को संस्थान के एक ही ओटी कॉम्प्लेक्स में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया, जिसके तहत एक साथ दो मरीजों को अंग प्रत्यारोपित किए गए। एक मरीज को किडनी दूसरे को लिवर ट्रांसप्लांट किया गया।

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टीम में ये रहे शामिल

अहमदाबाद के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रांजल मोदी के मार्गदर्शन एवं गाइडेंस में एम्स अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. बी सत्यश्री, डॉ. कर्मवीर सिंह, डॉ. रजनीश अरोड़ा, डॉ. शैरोन कंडारी, डॉ. वाईएस पयाल, डॉ. अंकुर मित्तल, डॉ. विकास पवार, डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. आनंद शर्मा, डॉ. कल्याणी, डॉ. शैरोन कंडारी, डॉ. भारती, डॉ. भारत भूषण भारद्वाज, डॉ. सारंग भारती आदि विशेषज्ञ चिकित्सक अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देने में शामिल रहे।

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दिल्ली एम्स भेजे गए एक किडनी और पैंक्रियाज



डोनेट की गई एक किडनी और पैंक्रियाज को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से बीती बृहस्पतिवार की रात में ही दिल्ली, एम्स को भेजा गया है। बताया गया है कि एम्स दिल्ली को भेजे गए अंगों का भी प्रत्यारोपण पूरी तरह से सफल रहा।

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कोट

सफलता का यह पहला पायदान है। एम्स इस दिशा में आगे तीव्रगति से सतत कार्य करते हुए उत्तराखंड के लोगों की चिकित्सा सेवा का कार्य करेगा। इसके साथ ही उन्हें अंगदान को लेकर जागरूक भी किया जाएगा। - प्रो. मीनू सिंह, निदेशक, एम्स ऋषिकेश
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