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Rishikesh News: कर्मचारियों को सिखाए गए फायर फाइटिंग के गुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sun, 29 Mar 2026 02:51 AM IST
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एम्स में व्यापक अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन तत्परता विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य संस्थान के प्रत्येक कर्मचारी को आग से बचाव और आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के प्रति जागरूक करना था।
शनिवार को कार्यशाला का उद्घाटन निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि संस्थान में कार्यरत सभी कर्मचारियों को अग्नि सुरक्षा उपायों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार के प्रशिक्षण से विशेष रूप से नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षाकर्मियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को आपात स्थिति में प्रभावी ढंग से कार्य करने का अनुभव मिलेगा।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने आग के जोखिम को कम करने, अग्निशामक यंत्रों के उपयोग, धुआं पहचानने वाले उपकरण (स्मोक डिटेक्टर), अलार्म सिस्टम तथा सुरक्षित निकासी प्रक्रियाओं पर विस्तृत जानकारी दी। सीबीआरआई रुड़की के वैज्ञानिक डॉ. सौरभ जैन और डॉ. ए. अरविंद कुमार सहित अग्निशमन विभाग ऋषिकेश के अधिकारियों ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया।
कार्यशाला के दौरान आपातकालीन निकासी मार्गों का सही उपयोग, कार्यस्थल पर ज्वलनशील पदार्थों की पहचान और सुरक्षित भंडारण, आग लगने की स्थिति में तुरंत फायर अलार्म सक्रिय करने तथा फायर सेवा (101) को सूचित करने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वाष्र्णेय, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री, पीआरओ डॉ. श्रीलोय मोहंती आदि मौजूद रहे।
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शनिवार को कार्यशाला का उद्घाटन निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि संस्थान में कार्यरत सभी कर्मचारियों को अग्नि सुरक्षा उपायों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार के प्रशिक्षण से विशेष रूप से नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षाकर्मियों और प्रशासनिक कर्मचारियों को आपात स्थिति में प्रभावी ढंग से कार्य करने का अनुभव मिलेगा।
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कार्यशाला में विशेषज्ञों ने आग के जोखिम को कम करने, अग्निशामक यंत्रों के उपयोग, धुआं पहचानने वाले उपकरण (स्मोक डिटेक्टर), अलार्म सिस्टम तथा सुरक्षित निकासी प्रक्रियाओं पर विस्तृत जानकारी दी। सीबीआरआई रुड़की के वैज्ञानिक डॉ. सौरभ जैन और डॉ. ए. अरविंद कुमार सहित अग्निशमन विभाग ऋषिकेश के अधिकारियों ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया।
कार्यशाला के दौरान आपातकालीन निकासी मार्गों का सही उपयोग, कार्यस्थल पर ज्वलनशील पदार्थों की पहचान और सुरक्षित भंडारण, आग लगने की स्थिति में तुरंत फायर अलार्म सक्रिय करने तथा फायर सेवा (101) को सूचित करने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वाष्र्णेय, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री, पीआरओ डॉ. श्रीलोय मोहंती आदि मौजूद रहे।