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चेतना में एकत्व सनातन संस्कृति का मूल संदेश : स्वामी चिदानंद
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फोटो-
परमार्थ निकेतन में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में इंडियन स्पिरिचुअल कॉन्फेडरेशन का दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और आध्यात्मिक ज्ञान को वैश्विक स्तर पर संरक्षित, प्रोत्साहित और प्रसारित करने के उद्देश्य से की गई।
साध्वी भगवती सरस्वती, डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, डॉ. राजेश रंजन ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि चेतना में एकत्व सनातन संस्कृति का मूल संदेश है। यह अनुभूति कराती है कि समस्त सृष्टि में वही एक परम चेतना प्रवाहित है, वही आत्मा सबमें विद्यमान है।
जब हम स्वयं को दूसरों से अलग नहीं, बल्कि जुड़ा हुआ अनुभव करते हैं, तभी प्रेम, करुणा और सहअस्तित्व का भाव जागृत होता है। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि करुणा सनातन धर्म की आत्मा और उसका प्राण है। भारतीय संस्कृति में धर्म का सार दया, प्रेम और परोपकार में निहित है।
सम्मेलन में ब्रह्मचारी प्रज्ञा चैतन्य, प्रमोद भटनागर, जितेंद्र मिश्रा, मोहन विलास दास, डॉ. नवल कपूर, जय कुमार, धीराज सरस्वती, अमित गर्ग, अर्पिता बापट, प्रदीप, डॉ. आशु गोयल आदि मौजूद रहे।
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परमार्थ निकेतन में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में इंडियन स्पिरिचुअल कॉन्फेडरेशन का दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और आध्यात्मिक ज्ञान को वैश्विक स्तर पर संरक्षित, प्रोत्साहित और प्रसारित करने के उद्देश्य से की गई।
साध्वी भगवती सरस्वती, डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, डॉ. राजेश रंजन ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि चेतना में एकत्व सनातन संस्कृति का मूल संदेश है। यह अनुभूति कराती है कि समस्त सृष्टि में वही एक परम चेतना प्रवाहित है, वही आत्मा सबमें विद्यमान है।
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जब हम स्वयं को दूसरों से अलग नहीं, बल्कि जुड़ा हुआ अनुभव करते हैं, तभी प्रेम, करुणा और सहअस्तित्व का भाव जागृत होता है। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि करुणा सनातन धर्म की आत्मा और उसका प्राण है। भारतीय संस्कृति में धर्म का सार दया, प्रेम और परोपकार में निहित है।
सम्मेलन में ब्रह्मचारी प्रज्ञा चैतन्य, प्रमोद भटनागर, जितेंद्र मिश्रा, मोहन विलास दास, डॉ. नवल कपूर, जय कुमार, धीराज सरस्वती, अमित गर्ग, अर्पिता बापट, प्रदीप, डॉ. आशु गोयल आदि मौजूद रहे।

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