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Rishikesh News: जर्जर भवन के कारण वर्षों से बंद है कैंटीन
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पीएलएमएस परिसर: मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत होने के बावजूद नहीं शुरू हुआ काम
संचालन शुरू नहीं होने पर दी आंदोलन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पीएलएमएस परिसर में अध्ययनरत 3500 से अधिक छात्र-छात्राओं को कैंटीन जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है। परिसर में कैंटीन भवन मौजूद होने के बावजूद उसकी जर्जर स्थिति के चलते उसे लंबे समय से बंद कर दिया गया है। इससे छात्रों को भोजन, नाश्ता जैसी दैनिक जरूरतों के लिए परिसर से बाहर जाना पड़ता है।
पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष एवं एनएसयूआई महानगर अध्यक्ष हिमांशु जाटव ने कहा कि कैंटीन संचालन की मांग को लेकर कई बार विश्वविद्यालय और परिसर प्रशासन से आग्रह किया गया, लेकिन छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। कहा कि कैंटीन भवन की मरम्मत के लिए धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया।
छात्रों ने नव नियुक्त कुलपति से भी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ छात्रों की मूलभूत आवश्यकताओं का ध्यान रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में कैंटीन का शीघ्र संचालन कराया जाना हजारों विद्यार्थियों के हित में आवश्यक है।
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जाटव ने कहा कि यदि जल्द ही कैंटीन भवन की मरम्मत कर उसका संचालन शुरू नहीं किया गया तो छात्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
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जर्जर भवन के नीचे पार्क वाहन दुर्घटना को दे रहे न्योता
जर्जर कैंटीन भवन के नीचे शिक्षकों के वाहन पार्क किए जा रहे हैं। बरसात में इस भवन की स्थिति और अधिक खराब हो गई है। बावजूद सुरक्षा कर्मियों के सामने ही जर्जर छत के नीचे वाहन पार्क किए जा रहे हैं। जो कभी भी किसी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
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- कैंटीन भवन का मरम्मत कार्य जल्द शुरू कर दिया जाएगा। छात्रों को कैंटीन सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। - दिनेश चंद्र, कुलसचिव, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि
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संचालन शुरू नहीं होने पर दी आंदोलन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पीएलएमएस परिसर में अध्ययनरत 3500 से अधिक छात्र-छात्राओं को कैंटीन जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है। परिसर में कैंटीन भवन मौजूद होने के बावजूद उसकी जर्जर स्थिति के चलते उसे लंबे समय से बंद कर दिया गया है। इससे छात्रों को भोजन, नाश्ता जैसी दैनिक जरूरतों के लिए परिसर से बाहर जाना पड़ता है।
पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष एवं एनएसयूआई महानगर अध्यक्ष हिमांशु जाटव ने कहा कि कैंटीन संचालन की मांग को लेकर कई बार विश्वविद्यालय और परिसर प्रशासन से आग्रह किया गया, लेकिन छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। कहा कि कैंटीन भवन की मरम्मत के लिए धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया।
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छात्रों ने नव नियुक्त कुलपति से भी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ छात्रों की मूलभूत आवश्यकताओं का ध्यान रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में कैंटीन का शीघ्र संचालन कराया जाना हजारों विद्यार्थियों के हित में आवश्यक है।
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जाटव ने कहा कि यदि जल्द ही कैंटीन भवन की मरम्मत कर उसका संचालन शुरू नहीं किया गया तो छात्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
जर्जर भवन के नीचे पार्क वाहन दुर्घटना को दे रहे न्योता
जर्जर कैंटीन भवन के नीचे शिक्षकों के वाहन पार्क किए जा रहे हैं। बरसात में इस भवन की स्थिति और अधिक खराब हो गई है। बावजूद सुरक्षा कर्मियों के सामने ही जर्जर छत के नीचे वाहन पार्क किए जा रहे हैं। जो कभी भी किसी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
- कैंटीन भवन का मरम्मत कार्य जल्द शुरू कर दिया जाएगा। छात्रों को कैंटीन सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। - दिनेश चंद्र, कुलसचिव, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि