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Rishikesh News: सीसी मार्ग की जगह इंटरलॉक टाइलों से बन रहे गांवों के आंतरित पैदल मार्ग
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Mon, 02 Feb 2026 02:27 AM IST
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विकासखंड के जुलेडी गांव में निर्माणाधीन इंटरलॉकिंग मार्ग- स्रोत- जागरूक पाठक
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पर्वतीय क्षेत्रों में आंतरिक सीसी मार्ग के स्थान पर अब इंटरलॉक टाइलों से पैदल मार्ग बनाए जा रहे हैं। विकासखंड में जिला योजना और राज्य योजना में अब सीसी मार्ग की जगह इंटरलॉक मार्ग निर्माण किए जा रहे हैं। इंटरलॉक टाइलों से निर्मित मार्ग जल्दी बनने के साथ-साथ सीसी रोड से ज्यादा कारगर भी है। बरसात के समय पैदल सीसी मार्गों पर काई लग जाती है, जिस कारण राहगीरों के फिसलने की आशंका रहती है। कई बार तो ग्रामीण काई लगे रास्तों पर फिसलकर चोटिल हो जाते हैं।
विकासखंड अधिकारियों ने बताया कि सीसी (सीमेंट कंक्रीट) मार्ग निर्माण के दौरान देखभाल बेहद मुश्किल होती थी। यदि किसी व्यस्त आवाजाही मार्ग में सीसी मार्ग निर्माण किया जा रहा है तो वहां पर आवाजाही को नहीं रोका जा सकता है। जबकि नियमानुसार सीसी मार्ग निर्माण के बाद 15 दिनों तक तराई और कंक्रीट ठोस होने के लिए छोड़ी जाती हैं। इसके बाद ही पैदल आवाजाही के अलावा पालतू पशुओं के लिए मार्ग खोला जाता है।
ऐसे में निर्धारित समय तक तराई न होने के कारण सीमेंट कमजोर पड़ जाता है और सीसी जल्द टूट जाती हैं। इंटरलॉक टाइलों से बनने वाले पैदल मार्गों में ऐसा नहीं है। नजदीकी बाजारों और फैक्ट्रियों से वहीं टाइलें ली जाती हैं, जिनका प्रयोगशाला में पक्की होने की पुष्टि हो जाती है।
इंटरलॉक लगाने से पहले नीचे रेत की कच्ची लेयर बिछाने के बाद ही टाइलें बिछाई जा सकती है। साथ ही दोनों छोरों पर इंटरलॉक न उखड़े इसके लिए सीमेंट का उपयोग होता है। इन पर हाथ के हाथ ही आवाजाही को सुचारु भी किया जा सकता है। इन सब स्थितियों को देखते हुए जिला योजना और राज्य योजना से गांवों के पैदल मार्गों के स्थान पर अब इंटरलॉक टाइलों के मार्ग के निर्माण का पैसा जारी किया जा रहा है।
हालांकि किस पंचायत में सीसी मार्ग निर्माण हो या इंटरलॉक निर्माण यह ग्राम पंचायत के ग्रामीणों पर निर्भर करता है। वर्तमान समय में विकासखंड के जुलेडी गांव में करीब दो लाख की लागत से आंतरिक पैदल मार्ग पर इंटरलॉक निर्माण किया जा रहा है। लगभग 15 वर्ष पूर्व जीर्णशीर्ण सीसी मार्ग के स्थान पर इंटरलॉक मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। ग्राम प्रधान रजनी देवी ने बताया कि ग्राम प्रधान बनने के बाद पंचायत में उनका पहला काम है।
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कोट
अच्छी गुणवत्ता की इंटरलॉक टाइल्स से पैदल मार्गों के निर्माण के निर्देश पंचायत अधिकारियों को दिए गए हैं। कार्य के दौरान विभागीय कर्मचारी और अभियंता मौके पर गुणवत्ता देखने जाएंगे। - दिनेश रावत सहायक विकास अधिकारी यमकेश्वर
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विकासखंड अधिकारियों ने बताया कि सीसी (सीमेंट कंक्रीट) मार्ग निर्माण के दौरान देखभाल बेहद मुश्किल होती थी। यदि किसी व्यस्त आवाजाही मार्ग में सीसी मार्ग निर्माण किया जा रहा है तो वहां पर आवाजाही को नहीं रोका जा सकता है। जबकि नियमानुसार सीसी मार्ग निर्माण के बाद 15 दिनों तक तराई और कंक्रीट ठोस होने के लिए छोड़ी जाती हैं। इसके बाद ही पैदल आवाजाही के अलावा पालतू पशुओं के लिए मार्ग खोला जाता है।
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ऐसे में निर्धारित समय तक तराई न होने के कारण सीमेंट कमजोर पड़ जाता है और सीसी जल्द टूट जाती हैं। इंटरलॉक टाइलों से बनने वाले पैदल मार्गों में ऐसा नहीं है। नजदीकी बाजारों और फैक्ट्रियों से वहीं टाइलें ली जाती हैं, जिनका प्रयोगशाला में पक्की होने की पुष्टि हो जाती है।
इंटरलॉक लगाने से पहले नीचे रेत की कच्ची लेयर बिछाने के बाद ही टाइलें बिछाई जा सकती है। साथ ही दोनों छोरों पर इंटरलॉक न उखड़े इसके लिए सीमेंट का उपयोग होता है। इन पर हाथ के हाथ ही आवाजाही को सुचारु भी किया जा सकता है। इन सब स्थितियों को देखते हुए जिला योजना और राज्य योजना से गांवों के पैदल मार्गों के स्थान पर अब इंटरलॉक टाइलों के मार्ग के निर्माण का पैसा जारी किया जा रहा है।
हालांकि किस पंचायत में सीसी मार्ग निर्माण हो या इंटरलॉक निर्माण यह ग्राम पंचायत के ग्रामीणों पर निर्भर करता है। वर्तमान समय में विकासखंड के जुलेडी गांव में करीब दो लाख की लागत से आंतरिक पैदल मार्ग पर इंटरलॉक निर्माण किया जा रहा है। लगभग 15 वर्ष पूर्व जीर्णशीर्ण सीसी मार्ग के स्थान पर इंटरलॉक मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। ग्राम प्रधान रजनी देवी ने बताया कि ग्राम प्रधान बनने के बाद पंचायत में उनका पहला काम है।
कोट
अच्छी गुणवत्ता की इंटरलॉक टाइल्स से पैदल मार्गों के निर्माण के निर्देश पंचायत अधिकारियों को दिए गए हैं। कार्य के दौरान विभागीय कर्मचारी और अभियंता मौके पर गुणवत्ता देखने जाएंगे। - दिनेश रावत सहायक विकास अधिकारी यमकेश्वर
