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Roorkee News: धोखाधड़ी के आरोपी क्लीनिक संचालक को नहीं मिली अग्रिम जमानत
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कूटरचना कर निवास प्रमाणपत्र बनवाने, असलाह के लाइसेंस और भूमि क्रय करने के मामले में आरोपी चीमा क्लीनिक गोवर्धनपुर के संचालक त्रिलोक सिंह की अग्रिम जमानत याचिका अपर सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार सिंह ने खारिज कर दी है। आरोपी त्रिलोक सिंह और उनकी पत्नी अमनप्रीत कौर के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में खानपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने बताया कि वादी कृपाल सिंह की ओर से 13 नवंबर 2025 को खानपुर थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में बताया गया था कि आरोपी त्रिलोक सिंह निवासी सलेमपुर जनपद बिजनौर उप्र हाल निवासी गोवर्धनपुर के शैक्षिक व अन्य प्रमाणपत्र जनपद बिजनौर से जारी हुए हैं। वर्ष 2024 की मतदाता सूची में नाम होने के साथ ही इसी वर्ष उन्होंने और उनके पिता ने वहां मतदान भी किया था।
29 अगस्त 2022 को उन्होंने उपजिलाधिकारी चांदपुर जनपद बिजनौर कार्यालय से निवास प्रमाणपत्र जारी कराया लेकिन उन्होंने अपने साथियों के साथ षडयंत्र के तहत सलेमपुर के परिवार रजिस्टर में 1 जनवरी 2018 को उनके परिवार के साथ गोवर्धनपुर जाने की बात दर्ज कराई। इसके बाद फर्जी परिवार रजिस्टर की नकल पर आधार कार्ड, राशनकार्ड बनवाकर उनके आधार पर लक्सर तहसील से स्थायी निवासी प्रमाणपत्र बनवाया गया।
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इन्हीं दस्तावेजों से आरोपी ने असलाह के लाइसेंस प्राप्त किए और बिना अनुमति उत्तराखंड में भूमि क्रय की। अन्य अभिलेखों में कूटरचना और परिजन के संबंध में गलत जानकारी दर्ज कराई गई। मामले में पुलिस अभी जांच कर रही है। इस बीच आरोपी त्रिलोक सिंह की ओर से स्वयं पर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताते हुए आरोपी के धोखाधड़ी, बेईमानी व फर्जी कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उनको असल के तौर पर प्रयोग किए जाने की बात कहते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत का विरोध किया। बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार सिंह ने आरोपी त्रिलोक सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने बताया कि वादी कृपाल सिंह की ओर से 13 नवंबर 2025 को खानपुर थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में बताया गया था कि आरोपी त्रिलोक सिंह निवासी सलेमपुर जनपद बिजनौर उप्र हाल निवासी गोवर्धनपुर के शैक्षिक व अन्य प्रमाणपत्र जनपद बिजनौर से जारी हुए हैं। वर्ष 2024 की मतदाता सूची में नाम होने के साथ ही इसी वर्ष उन्होंने और उनके पिता ने वहां मतदान भी किया था।
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29 अगस्त 2022 को उन्होंने उपजिलाधिकारी चांदपुर जनपद बिजनौर कार्यालय से निवास प्रमाणपत्र जारी कराया लेकिन उन्होंने अपने साथियों के साथ षडयंत्र के तहत सलेमपुर के परिवार रजिस्टर में 1 जनवरी 2018 को उनके परिवार के साथ गोवर्धनपुर जाने की बात दर्ज कराई। इसके बाद फर्जी परिवार रजिस्टर की नकल पर आधार कार्ड, राशनकार्ड बनवाकर उनके आधार पर लक्सर तहसील से स्थायी निवासी प्रमाणपत्र बनवाया गया।
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इन्हीं दस्तावेजों से आरोपी ने असलाह के लाइसेंस प्राप्त किए और बिना अनुमति उत्तराखंड में भूमि क्रय की। अन्य अभिलेखों में कूटरचना और परिजन के संबंध में गलत जानकारी दर्ज कराई गई। मामले में पुलिस अभी जांच कर रही है। इस बीच आरोपी त्रिलोक सिंह की ओर से स्वयं पर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताते हुए आरोपी के धोखाधड़ी, बेईमानी व फर्जी कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उनको असल के तौर पर प्रयोग किए जाने की बात कहते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत का विरोध किया। बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार सिंह ने आरोपी त्रिलोक सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।