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Roorkee News: लिब्बरहेड़ी-हरचंदपुर के बीच सर्की रजवाहा टूटा, 500 बीघा फसल जलमग्न
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नारसन क्षेत्र में रजवाह टूटने के बाद किसानों के खेत में भरा पानी। स्रोत पाठक
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क्षेत्र के लिब्बरहेड़ी और हरचंदपुर गांव के बीच बुधवार सुबह सिंचाई विभाग के सर्की रजवाहे की पटरी अचानक टूट गई। पटरी टूटने से नहर का पानी तेज बहाव के साथ किसानों के खेतों में घुस गया। देखते ही देखते सैकड़ों बीघा कृषि भूमि झील में तब्दील हो गई। इससे गेहूं और गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।
सुबह जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे तो उन्होंने रजवाहे की पटरी को कटा हुआ पाया। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही घंटों में लिब्बरहेड़ी और हरचंदपुर के बीच का बड़ा इलाका जलमग्न हो गया। गेहूं की फसल जो इस समय तैयार होने की कगार पर है पूरी तरह पानी में डूब गई है। किसानों का कहना है कि जलभराव के कारण गेहूं के दाने काले पड़ सकते हैं और फसल गल सकती है।
किसानों ने सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि रजवाहे की पटरियों की सफाई और सुदृढ़ीकरण समय पर नहीं किया गया। चूहों और दरारों के कारण पटरी कमजोर हो जा रही है जिसकी शिकायत के बावजूद ध्यान नहीं दिया गया। अचानक हुए इस नुकसान से किसानों की सालभर की जमा-पूंजी डूब चुकी है। विभाग की ओर से तत्काल मदद न मिलने पर ग्रामीणों ने खुद ही फावड़े और मिट्टी के कट्टे लेकर पटरी को बांधने की कोशिश की लेकिन पानी का स्तर अधिक होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी। समाचार लिखे जाने तक पानी का रिसाव जारी था और कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था।
सर्की रजवाहा टूटने से 400 से 500 बीघा जंगल व खेत बह गया है। गेहूं और सरसों की फसल नष्ट हो गई है। जो गन्ना बोया गया था वो भी खराब हो गया है। शासन-प्रशासन से मांग है कि फसलों के नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिलाया जाए। पिछले नवंबर में भी सर्की रजवाहा टूट गया था। समय-समय पर मरम्मत और रखरखाव पर सिंचाई विभाग को ध्यान देना चाहिए। -राकेश लोहान, जिला प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत)
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सुबह जब किसान अपने खेतों पर पहुंचे तो उन्होंने रजवाहे की पटरी को कटा हुआ पाया। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही घंटों में लिब्बरहेड़ी और हरचंदपुर के बीच का बड़ा इलाका जलमग्न हो गया। गेहूं की फसल जो इस समय तैयार होने की कगार पर है पूरी तरह पानी में डूब गई है। किसानों का कहना है कि जलभराव के कारण गेहूं के दाने काले पड़ सकते हैं और फसल गल सकती है।
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किसानों ने सिंचाई विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि रजवाहे की पटरियों की सफाई और सुदृढ़ीकरण समय पर नहीं किया गया। चूहों और दरारों के कारण पटरी कमजोर हो जा रही है जिसकी शिकायत के बावजूद ध्यान नहीं दिया गया। अचानक हुए इस नुकसान से किसानों की सालभर की जमा-पूंजी डूब चुकी है। विभाग की ओर से तत्काल मदद न मिलने पर ग्रामीणों ने खुद ही फावड़े और मिट्टी के कट्टे लेकर पटरी को बांधने की कोशिश की लेकिन पानी का स्तर अधिक होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी। समाचार लिखे जाने तक पानी का रिसाव जारी था और कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था।
सर्की रजवाहा टूटने से 400 से 500 बीघा जंगल व खेत बह गया है। गेहूं और सरसों की फसल नष्ट हो गई है। जो गन्ना बोया गया था वो भी खराब हो गया है। शासन-प्रशासन से मांग है कि फसलों के नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिलाया जाए। पिछले नवंबर में भी सर्की रजवाहा टूट गया था। समय-समय पर मरम्मत और रखरखाव पर सिंचाई विभाग को ध्यान देना चाहिए। -राकेश लोहान, जिला प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत)

नारसन क्षेत्र में रजवाह टूटने के बाद किसानों के खेत में भरा पानी। स्रोत पाठक