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Roorkee News: पूर्ण साक्षर राज्य की खुशी के बीच बीआरपी-सीआरपी का दर्द
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उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर राज्य घोषित होने की खुशी के बीच बुधवार को ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी) और क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) कर्मचारियों ने अपने भविष्य, सेवा सुरक्षा और मानदेय पर चिंता जताई है। प्रदेश में करीब 800 बीआरपी-सीआरपी कर्मचारी आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से कार्यरत हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि नियुक्ति के समय उन्हें 40 हजार रुपये मासिक मानदेय देने का आश्वासन दिया गया था लेकिन विभिन्न मदों के नाम पर लगातार कटौती की जा रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि शुरुआत में कटौती के बाद उनके खातों में लगभग 28 हजार रुपये पहुंचते थे जबकि अब यह राशि घटकर करीब 22 हजार रुपये रह गई है। उनका आरोप है कि बढ़ते खर्चों के बीच इतनी कम आय में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। उनका यह भी कहना है कि बिना स्पष्ट जानकारी के की जा रही कटौतियों से आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी बढ़ रही है।
बीआरपी-सीआरपी कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी समस्याओं के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिकायत करते हैं तो उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि वे विभाग के नहीं बल्कि आउटसोर्स कंपनी के कर्मचारी हैं। वहीं, कंपनी के अधिकारियों से संपर्क करने पर भी उनकी शिकायतों का समाधान नहीं किया जाता। कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि अपनी मांगें उठाने पर उन्हें नौकरी से हटाने तक की धमकियां दी जाती हैं जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शासन से आउटसोर्स व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समग्र शिक्षा के माध्यम से सीधे मानदेय भुगतान की व्यवस्था की जाए, सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और तय मानदेय समय पर बिना अनावश्यक कटौती के उपलब्ध कराया जाए।
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कर्मचारियों का कहना है कि शुरुआत में कटौती के बाद उनके खातों में लगभग 28 हजार रुपये पहुंचते थे जबकि अब यह राशि घटकर करीब 22 हजार रुपये रह गई है। उनका आरोप है कि बढ़ते खर्चों के बीच इतनी कम आय में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। उनका यह भी कहना है कि बिना स्पष्ट जानकारी के की जा रही कटौतियों से आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी बढ़ रही है।
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बीआरपी-सीआरपी कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी समस्याओं के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिकायत करते हैं तो उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि वे विभाग के नहीं बल्कि आउटसोर्स कंपनी के कर्मचारी हैं। वहीं, कंपनी के अधिकारियों से संपर्क करने पर भी उनकी शिकायतों का समाधान नहीं किया जाता। कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि अपनी मांगें उठाने पर उन्हें नौकरी से हटाने तक की धमकियां दी जाती हैं जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शासन से आउटसोर्स व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समग्र शिक्षा के माध्यम से सीधे मानदेय भुगतान की व्यवस्था की जाए, सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और तय मानदेय समय पर बिना अनावश्यक कटौती के उपलब्ध कराया जाए।
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