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Tehri News: अदवाणी के जंगल में पेड़ काटने पर भड़के ग्रामीण
Thu, 13 Aug 2026 07:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Thu, 13 Aug 2026 07:07 PM IST
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चंबा (टिहरी)। अदवाणी के आरक्षित वन क्षेत्र में फायर लाइन बनाने के लिए चीड़ के हरे पेड़ों के कटान का ग्रामीणों ने विरोध किया। बृहस्पतिवार को हुई खुली बैठक में ग्रामीणों ने पेड़ों के कटान पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि कटान नहीं रुका तो क्षेत्र में दूसरी बार चिपको आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ग्राम प्रधान विजय सिंह भंडारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों ने फायर लाइन की आड़ में हरे चीड़ के पेड़ काटे जाने पर रोष जताया। ग्रामीणों के विरोध के बाद पेड़ काटने आए श्रमिक मौके से लौट गए। सूचना पर पहुंचे वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी किशोर नौटियाल ने ग्रामीणों से वार्ता की। उन्होंने बताया कि फायर लाइन बनाने के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे हरे पेड़ों का कटान नहीं होने देंगे। वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी नौटियाल और रेंजर शैलेंद्र सिंह नेगी ने फिलहाल पेड़ नहीं काटने का आश्वासन दिया।
पर्यावरणविद विजय जड़धारी ने कहा कि फायर लाइन के नाम पर बड़े हरे चीड़ के पेड़ों को काटने की अनुमति देना उचित नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1978 में इसी अदवाणी के जंगल में चिपको आंदोलन हुआ था। तब भी जंगल को बचाने के लिए आंदोलन किया गया था। ग्रामीणों ने बैठक में प्रस्ताव पारित किया कि यदि जंगल में पेड़ों का कटान किया गया तो क्षेत्र में दूसरी बार चिपको आंदोलन चलाया जाएगा।
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अदवाणी क्षेत्र में 15 मीटर चौड़ी फायर लाइन बनाने के लिए 150 से अधिक हरे चीड़ के पेड़ों के कटान की अनुमति है। इनमें से कुछ पेड़ वन विभाग द्वारा पहले ही काटे जा चुके हैं। बैठक में जन जागृति संस्थान के अध्यक्ष अरण्य रंजन, दयाल भाई, नरेंद्र सिंह, विक्रम सिंह, रविंद्र रावत, विजयपाल सिंह, किशन सिंह रावत, रणजीत सिंह, कुलबीर सिंह रावत, पूर्व प्रधान प्रमिला देवी, सुविधा देवी आदि मौजूद रहे।
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ग्राम प्रधान विजय सिंह भंडारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों ने फायर लाइन की आड़ में हरे चीड़ के पेड़ काटे जाने पर रोष जताया। ग्रामीणों के विरोध के बाद पेड़ काटने आए श्रमिक मौके से लौट गए। सूचना पर पहुंचे वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी किशोर नौटियाल ने ग्रामीणों से वार्ता की। उन्होंने बताया कि फायर लाइन बनाने के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे हरे पेड़ों का कटान नहीं होने देंगे। वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी नौटियाल और रेंजर शैलेंद्र सिंह नेगी ने फिलहाल पेड़ नहीं काटने का आश्वासन दिया।
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पर्यावरणविद विजय जड़धारी ने कहा कि फायर लाइन के नाम पर बड़े हरे चीड़ के पेड़ों को काटने की अनुमति देना उचित नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1978 में इसी अदवाणी के जंगल में चिपको आंदोलन हुआ था। तब भी जंगल को बचाने के लिए आंदोलन किया गया था। ग्रामीणों ने बैठक में प्रस्ताव पारित किया कि यदि जंगल में पेड़ों का कटान किया गया तो क्षेत्र में दूसरी बार चिपको आंदोलन चलाया जाएगा।
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अदवाणी क्षेत्र में 15 मीटर चौड़ी फायर लाइन बनाने के लिए 150 से अधिक हरे चीड़ के पेड़ों के कटान की अनुमति है। इनमें से कुछ पेड़ वन विभाग द्वारा पहले ही काटे जा चुके हैं। बैठक में जन जागृति संस्थान के अध्यक्ष अरण्य रंजन, दयाल भाई, नरेंद्र सिंह, विक्रम सिंह, रविंद्र रावत, विजयपाल सिंह, किशन सिंह रावत, रणजीत सिंह, कुलबीर सिंह रावत, पूर्व प्रधान प्रमिला देवी, सुविधा देवी आदि मौजूद रहे।