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सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला : रील टू रियल...एक किसान को पुलिस ने बना दिया हिस्ट्रीशीटर

आदर्श सिंह Published by: गायत्री जोशी Updated Tue, 13 Jan 2026 01:31 PM IST
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सार

काशीपुर में किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं जहां धोखाधड़ी के मामलों में उसे हिस्ट्रीशीटर बनाए जाने को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।

A farmer was declared a history-sheeter by the police in kashipur
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशीपुर में पुलिस की कार्यशैली की जरा बानगी तो देखिए। किस तरह से एक किसान को हिस्ट्रीशीटर बना देती है। दो दिन पहले हल्द्वानी में आत्महत्या करने वाले सुखवंत सिंह के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। उसने न तो हत्या की थी और न ही लूट या डकैती जैसी संगीन अपराधों को अंजाम दिया। पुलिस ने उसके खिलाफ एक ही थाने में चार और कोतवाली जसपुर में धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद उसके खिलाफ 14 सितंबर 2021 को थाना आईटीआई में हिस्ट्रीशीट संख्या 05 ए खोली गई। गौर करने की बात यह है कि सुखवंत से धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ भी पांच-पांच मामले दर्ज हैं, लेकिन उनमें से किसी को भी पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर नहीं बनाया।

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आईटीआई थाना क्षेत्र के ग्राम दक्षिणी पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह ने हल्द्वानी के गौलापार स्थित देवभूमि होटल में शनिवार देर रात खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के दो दिन पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था जिसमें चार लोगों पर 3.82 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था। पुलिस वालों पर भी रुपये लेकर कार्रवाई नहीं करने का गंभीर आरोप लगाया था।
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पीड़ित के बयान से पुलिस भी शक के घेरे में आ गई है। धीरे- धीरे मामला फिल्मी होता नजर आ रहा है। कैसे रील की तरह रियल में एक ओम आदमी को अपराधी बनाकर आरने के लिए विवश किया जाता है।

दरअसल, पीड़ित के खिलाफ वर्ष 2018 में आईटीआई थाना में धारा 420 में चार प्राथमिकी दर्ज हैं। वर्ष 2020 में भी धारा 420, 467, 468, 471, 411 कोतवाली जसपुर में प्राथमिकी दर्ज हैं।

पुलिस के अनुसार पीड़ित लगातार आपराधिक कृत्यों में लिप्त था इसलिए उसके खिलाफ 14 सितंबर 2021 को थाना आईटीआई में हिस्ट्रीशीट संख्या 05ए खोली गई थी लेकिन गौर करने की बात यह है कि मृतक सुखवंत सिंह के साथ चोखाधड़ी करने वाले मुख्य आरोपी अमरजीत सिंह, आशीष चौहान के खिलाफ भी धोखाधड़ी की पांच- पांच और गुरप्रेम सिंह के खिलाफ तीन प्राथमिकी दर्ज हैं, जबकि चौथे आरोपी कुलविंदर सिंह के खिलाफ कोई जानकारी नहीं मिली है। इन लोगों के खिलाफ पुलिस ने क्यों नहीं हिस्ट्रीशीट खोली। पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर लोग तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं। पुलिस की अब तक की कार्रवाई से भी कोई संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है।

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