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Udham Singh Nagar News: बस सीज, जेब खाली...खुले आसमान में असुरक्षा के बीच कटी बेचैनी भरीं तीन रातें

Fri, 14 Aug 2026 01:02 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Fri, 14 Aug 2026 01:02 AM IST
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Bus impounded, pockets empty... three anxious nights spent under the open sky amidst a sense of insecurity.
रुद्रपुर। ओवरलोडिंग बस में सफर करना मजदूर यात्रियों के गले की फांस बन गया है। जिनके पास आगे की यात्रा करने के लिए रुपये थे वह दूसरी बस से रवाना हो गए लेकिन जिनकी जेब ही बस का किराया देने में खाली हो गई, ऐसे बेबस यात्री महिला, बच्चों को लेकर रोडवेज बस अड्डे पर दिन और रात गुजारने के लिए मजबूर हो गए।
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उनके मन में एक ही सवाल है कि आखिर कब पहुंचेंगे अपने घर.. हैरानी की बात है कि कार्रवाई के बाद इन यात्रियों की किसी भी महकमे ने सुध नहीं ली। रोडवेज प्रशासन ने रात गुजारने के लिए छत तो दी लेकिन मजदूरों के पास खाने तक को पैसे नहीं थे क्योंकि 800 रुपये किराया ही उनके दो दिन की कमाई के बराबर है। बस चालक और परिचालक पर सीज और चालानी कार्रवाई तो हो गई लेकिन गरीब यात्री बस इस इंतजार में बैठे रहे कि आखिर कब वह अपने गंतव्य को रवाना होंगे। एक तरह से इन यात्रियों पर गरीबी की दोहरी मार पड़ी है। पहले कम किराये का लालच देकर उन्हें भेड़ बकरियों की तरह 30 सीट वाली बस में ठूंस दिया गया और जब कार्रवाई हुई तो उन्हें तीन दिन तक अपने आशियाने से दूर रहना पड़ा।
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तीन बस में इमरजेंसी एक्जिट तक नहीं
एक बस पूरी तरह से क्षतिग्रस्त थी। उसे देखकर लग रहा था कि कितनी बार बस के साथ हादसा हुआ होगा। इसके अलावा रोडवेज परिसर में खड़ीं चार सीज बसों में से तीन में तो इमरजेंसी एक्जिट तक नहीं था। अगर कोई आपातकाल स्थिति आती तो यात्रियों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिलता।
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पैसे नहीं होने पर गुरुद्वारे के लंगर से मिटाई भूख
तीन दिन से रोडवेज परिसर में रह रहे बहराइच के यात्री यह सोच कर आए थे कि वह अगली सुबह जालंधर तक कैसे भी करके पहुंच जाएं तो वहां जाकर आराम से खाना खाएंगे लेकिन रुद्रपुर में कार्रवाई के बाद उन्हें गुरुद्वारे के लंगर में भूख मिटानी पड़ी। कुछ सेवक उन्हें तीन दिन तक भोजन उपलब्ध कराते रहे।
800 में से 300 रुपये ही किए वापस
हैरानी की बात है कि यात्रियों के पास पैसे नहीं थे जिसके कारण वह रवाना नहीं हो सके। जब उन्होंने परिचालक से पैसे वापस मांगे तो 800 में से सिर्फ 300 रुपये ही उन्हें दिए गए। इस पर कोई भी प्रशासन का अधिकारी आगे तक नहीं आया जिससे वह अपना सफर तय कर पाते। बृहस्पतिवार की दोपहर बाकी सभी यात्री किराये मिलने पर अपने गंतव्य को लौटे।


सरकारी बस में 1000 रुपये किराया, लालच में फंस गए
बहराइच निवासी यात्री सूरज के अनुसार, बहराइच से जालंधर का किराया सरकारी बस में 1000 रुपये है। इतने पैसे नहीं थे, इसलिए वह प्राइवेट बस में बैठ गए। उन्हें क्या पता था कि कम किराये के लालच में वह तीन दिन तक रुद्रपुर में ही फंसे रहेंगे।
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