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Udham Singh Nagar News: आम की पैदावार पर छाया संकट, पेड़ों पर लगा चेपा रोग
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 07 Apr 2026 01:09 AM IST
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रुद्रपुर। तराई में आम की पैदावार पर संकट मंडरा रहा है। अधिकतर पेड़ों पर चेपा रोग का प्रभाव देखने को मिल रहा है। इसके कारण बागवानों की चिंता बढ़ गई है। पिछले साल भी चेपा रोग के कारण करीब 60 फीसदी पैदावार प्रभावित हुई थी।
जानकारी के अनुसार, जिले के कई इलाकों में आम के पेड़ों पर चेपा (कीट) तेजी से फैल रहा है। इस कारण फल बनने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है और जो फल लगते भी हैं वे समय से पहले गिर जाते हैं। बागान मालिक और ठेकेदारों का कहना है कि इस बार शुरुआती दौर में ही इस कीट ने असर दिखाना शुरू कर दिया है जिससे व्यापक नुकसान की आशंका बढ़ गई है। उद्यान विभाग ने किसानों को समय रहते कीटनाशकों का छिड़काव करने और पेड़ों की नियमित निगरानी रखने की सलाह दी है।
चेपा कीट आम के पेड़ों के लिए गंभीर खतरा है। यह कीट पत्तियों और नई टहनियों से रस चूस कर पेड़ों को कमजोर कर देता है जिससे फूल और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। अगर समय रहते इसका नियंत्रण न किया जाए तो यह तेजी से पूरे बाग को नुकसान पहुंचा सकता है। बागवान नियमित निगरानी रखें और शुरुआती लक्षण दिखते ही अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें। साथ ही जैविक तरीकों को भी अपनाएं। - डॉ. पूनम श्रीवास्तव, पूर्व कीट वैज्ञानिक, पंतनगर विश्वविद्यालय
आम के बागानों में चेपा कीट के प्रकोप को गंभीरता से लिया गया है और प्रभावित क्षेत्रों में जल्द जरूरी कदम उठाए जाएंगे। किसानों को सलाह दी गई है कि वह समय रहते कीटनाशकों का छिड़काव करें और पेड़ों की नियमित निगरानी रखें ताकि नुकसान को नियंत्रित किया जा सके। - प्रभाकर सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
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जानकारी के अनुसार, जिले के कई इलाकों में आम के पेड़ों पर चेपा (कीट) तेजी से फैल रहा है। इस कारण फल बनने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है और जो फल लगते भी हैं वे समय से पहले गिर जाते हैं। बागान मालिक और ठेकेदारों का कहना है कि इस बार शुरुआती दौर में ही इस कीट ने असर दिखाना शुरू कर दिया है जिससे व्यापक नुकसान की आशंका बढ़ गई है। उद्यान विभाग ने किसानों को समय रहते कीटनाशकों का छिड़काव करने और पेड़ों की नियमित निगरानी रखने की सलाह दी है।
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चेपा कीट आम के पेड़ों के लिए गंभीर खतरा है। यह कीट पत्तियों और नई टहनियों से रस चूस कर पेड़ों को कमजोर कर देता है जिससे फूल और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। अगर समय रहते इसका नियंत्रण न किया जाए तो यह तेजी से पूरे बाग को नुकसान पहुंचा सकता है। बागवान नियमित निगरानी रखें और शुरुआती लक्षण दिखते ही अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें। साथ ही जैविक तरीकों को भी अपनाएं। - डॉ. पूनम श्रीवास्तव, पूर्व कीट वैज्ञानिक, पंतनगर विश्वविद्यालय
आम के बागानों में चेपा कीट के प्रकोप को गंभीरता से लिया गया है और प्रभावित क्षेत्रों में जल्द जरूरी कदम उठाए जाएंगे। किसानों को सलाह दी गई है कि वह समय रहते कीटनाशकों का छिड़काव करें और पेड़ों की नियमित निगरानी रखें ताकि नुकसान को नियंत्रित किया जा सके। - प्रभाकर सिंह, जिला उद्यान अधिकारी