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Udham Singh Nagar News: ‘मंथन’ ने दिखाई संस्कृति और डिजिटल शक्ति से राष्ट्रनिर्माण की राह
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 13 Jan 2026 01:41 AM IST
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पंतनगर। भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ें और आधुनिक तकनीक की असीम संभावनाएं जब दोनों एक-दूसरे का मार्गदर्शन करें, तब युवा केवल भविष्य की आशा ही नहीं बल्कि वर्तमान के सक्रिय राष्ट्र निर्माता बनते हैं। इसी दृष्टिकोण के साथ विवेकानंद स्वाध्याय मंडल की ओर से आयोजित ’युवा-2026’ राष्ट्रीय युवा जागरण महोत्सव के तहत 21वीं राष्ट्रीय युवा संगोष्ठी का आयोजन पंतनगर विवि में किया गया।
इस वर्ष ‘मंथन’ का आयोजन 12 जनवरी से शुरू हुआ। इसमें देश के 30 से अधिक विश्वविद्यालयों ने सहभागिता की। इस वर्ष की थीम ‘सांस्कृतिक जड़ें और डिजिटल शक्ति- प्रौद्योगिकीय नवाचारों से सांस्कृतिक सुदृढ़ीकरण और राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं का मार्गदर्शन’ ने युवाओं को परंपरा और प्रौद्योगिकी के सार्थक समन्वय के लिए प्रेरित किया।
अलसुबह पांच बजे युवा रैली निकाली गई। इसके बाद सत्रों का शुभारंभ प्रख्यात विचारकों के संवादों से हुआ। इस दौरान शोध पत्रों के एक संकलन का विमोचन भी किया गया। साथ ही गिरिजेश महरा, अमन कंबोज और दीपक प्रकाश की लिखित विवेक कथामृत पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
-इन्सेट
विवेकानंद के विचार सशक्त राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा
विवेकानंद स्वाध्याय मंडल के मेंटर डॉ. एसके कश्यप ने कहा कि 21 वर्षों से यह कार्यक्रम छात्रों की ओर से विद्यार्थियों के लिए ही होता है। विवेकानंद के विचार हमें प्रतिदिन एक आत्मनिर्भर, सशक्त और मूल्य-आधारित राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।
ऊर्जा और विचारों को विकसित करने का अवसर
कुलपति डॉ. एमएस चौहान ने कहा कि युवा जैसे ज्ञानवर्धक मंच से प्रतिभाओं को राष्ट्र के विकास के लिए अपनी ऊर्जा और विचारों को विकसित करने का अवसर मिलता है। यह आवश्यक है कि हम उनकी क्षमता को बड़े उद्देश्यों की ओर निर्देशित करें।
प्रतिभागियों में स्वामित्व और नेतृत्व की भावना विकसित
विवेकानंद स्वाध्याय मंडल की संयोजक प्रेरणा तिवारी ने कहा कि संवाद, चिंतन और मार्गदर्शन से यह सम्मेलन युवा प्रतिभागियों में स्वामित्व और नेतृत्व की भावना विकसित करता है। साथ ही इस बात की पुष्टि करता है कि जागरूक और मूल्य-आधारित युवा ही समावेशी राष्ट्र के भविष्य को आकार देने के केंद्र में हैं।
राष्ट्र निर्माण ऐसा हो कि हम अपनी संस्कृति से जुड़े रहें
‘मंथन’ की राष्ट्रीय समन्वयक रितिका सिंह और यश जोशी ने कहा कि यह सम्मेलन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को तेजी से बदलती तकनीक से सामंजस्य बिठाने की आवश्यकता पर बल देता है। राष्ट्र निर्माण इस प्रकार होना चाहिए कि हम अपनी संस्कृति से जुड़े रहें और आधुनिक युग की तकनीकों का भी समुचित लाभ उठाएं। संवाद
-इन्सेट
सामूहिक कल्याण सच्ची प्रगति
पद्मश्री चैतराम पवार ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने, अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने और समाज व राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान किया। कहा कि सच्ची प्रगति वही है, जिसमें व्यक्तिगत उन्नति के साथ सामूहिक कल्याण को भी समान महत्व दिया जाए। संवाद
-इन्सेट
तकनीक तभी सार्थक, जब वह राष्ट्रहित से जुड़ी हो
अखिल भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी प्रमुख विवेकानंद केंद्र हार्दिक मेहता ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक तब ही सार्थक है, जब वह सेवा, समर्पण और राष्ट्रहित से जुड़ी हो।
तकनीक को सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनाएं
सॉफ्टवेयर अभियांत्रिकी इंटेल कॉर्पोरेशन उपाध्यक्ष चवन मेहरा ने कहा कि डिजिटल प्रगति तभी सार्थक होती है, जब वह नैतिक मूल्यों, उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़े। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीक को केवल सुविधा का साधन न बनाकर समाज के सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनाएं। संवाद
तकनीकी सफलता के साथ सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी जुड़ी
इसरो के वैज्ञानिक सुरेश कुमार ने कहा कि प्रत्येक तकनीकी सफलता के साथ एक सांस्कृतिक जिम्मेदारी जुड़ी होती है। हम कैसे नवाचार करते हैं, विज्ञान को कैसे लागू करते हैं और इससे किसे लाभ होता है, ये निर्णय एक समाज की आत्मा को परिभाषित करते हैं। इस संस्कृति को समझना होगा। परंपराओं का सम्मान करना होगा और युवाओं को जिम्मेदारी से प्रश्न पूछने, खोज करने और नवाचार करने के लिए सशक्त बनाना होगा।
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इस वर्ष ‘मंथन’ का आयोजन 12 जनवरी से शुरू हुआ। इसमें देश के 30 से अधिक विश्वविद्यालयों ने सहभागिता की। इस वर्ष की थीम ‘सांस्कृतिक जड़ें और डिजिटल शक्ति- प्रौद्योगिकीय नवाचारों से सांस्कृतिक सुदृढ़ीकरण और राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं का मार्गदर्शन’ ने युवाओं को परंपरा और प्रौद्योगिकी के सार्थक समन्वय के लिए प्रेरित किया।
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अलसुबह पांच बजे युवा रैली निकाली गई। इसके बाद सत्रों का शुभारंभ प्रख्यात विचारकों के संवादों से हुआ। इस दौरान शोध पत्रों के एक संकलन का विमोचन भी किया गया। साथ ही गिरिजेश महरा, अमन कंबोज और दीपक प्रकाश की लिखित विवेक कथामृत पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
-इन्सेट
विवेकानंद के विचार सशक्त राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा
विवेकानंद स्वाध्याय मंडल के मेंटर डॉ. एसके कश्यप ने कहा कि 21 वर्षों से यह कार्यक्रम छात्रों की ओर से विद्यार्थियों के लिए ही होता है। विवेकानंद के विचार हमें प्रतिदिन एक आत्मनिर्भर, सशक्त और मूल्य-आधारित राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।
ऊर्जा और विचारों को विकसित करने का अवसर
कुलपति डॉ. एमएस चौहान ने कहा कि युवा जैसे ज्ञानवर्धक मंच से प्रतिभाओं को राष्ट्र के विकास के लिए अपनी ऊर्जा और विचारों को विकसित करने का अवसर मिलता है। यह आवश्यक है कि हम उनकी क्षमता को बड़े उद्देश्यों की ओर निर्देशित करें।
प्रतिभागियों में स्वामित्व और नेतृत्व की भावना विकसित
विवेकानंद स्वाध्याय मंडल की संयोजक प्रेरणा तिवारी ने कहा कि संवाद, चिंतन और मार्गदर्शन से यह सम्मेलन युवा प्रतिभागियों में स्वामित्व और नेतृत्व की भावना विकसित करता है। साथ ही इस बात की पुष्टि करता है कि जागरूक और मूल्य-आधारित युवा ही समावेशी राष्ट्र के भविष्य को आकार देने के केंद्र में हैं।
राष्ट्र निर्माण ऐसा हो कि हम अपनी संस्कृति से जुड़े रहें
‘मंथन’ की राष्ट्रीय समन्वयक रितिका सिंह और यश जोशी ने कहा कि यह सम्मेलन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को तेजी से बदलती तकनीक से सामंजस्य बिठाने की आवश्यकता पर बल देता है। राष्ट्र निर्माण इस प्रकार होना चाहिए कि हम अपनी संस्कृति से जुड़े रहें और आधुनिक युग की तकनीकों का भी समुचित लाभ उठाएं। संवाद
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सामूहिक कल्याण सच्ची प्रगति
पद्मश्री चैतराम पवार ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने, अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने और समाज व राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान किया। कहा कि सच्ची प्रगति वही है, जिसमें व्यक्तिगत उन्नति के साथ सामूहिक कल्याण को भी समान महत्व दिया जाए। संवाद
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तकनीक तभी सार्थक, जब वह राष्ट्रहित से जुड़ी हो
अखिल भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी प्रमुख विवेकानंद केंद्र हार्दिक मेहता ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक तब ही सार्थक है, जब वह सेवा, समर्पण और राष्ट्रहित से जुड़ी हो।
तकनीक को सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनाएं
सॉफ्टवेयर अभियांत्रिकी इंटेल कॉर्पोरेशन उपाध्यक्ष चवन मेहरा ने कहा कि डिजिटल प्रगति तभी सार्थक होती है, जब वह नैतिक मूल्यों, उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़े। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीक को केवल सुविधा का साधन न बनाकर समाज के सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनाएं। संवाद
तकनीकी सफलता के साथ सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी जुड़ी
इसरो के वैज्ञानिक सुरेश कुमार ने कहा कि प्रत्येक तकनीकी सफलता के साथ एक सांस्कृतिक जिम्मेदारी जुड़ी होती है। हम कैसे नवाचार करते हैं, विज्ञान को कैसे लागू करते हैं और इससे किसे लाभ होता है, ये निर्णय एक समाज की आत्मा को परिभाषित करते हैं। इस संस्कृति को समझना होगा। परंपराओं का सम्मान करना होगा और युवाओं को जिम्मेदारी से प्रश्न पूछने, खोज करने और नवाचार करने के लिए सशक्त बनाना होगा।