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Udham Singh Nagar News: नाबालिग छात्रों के हाथ में वाहनों का हैंडल, जिम्मेदार बेखबर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 01 May 2026 12:57 AM IST
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रुद्रपुर। जिस उम्र में बच्चों के कंधों पर स्कूली बस्ता होना चाहिए। उसी उम्र में वह बाइक और स्कूटर के हैंडल थामे सड़कों पर रफ्तार भरते नजर आ रहे हैं। स्कूल ड्रेस में नाबालिग छात्र बिना हेलमेट के मुख्य मार्गों पर तेज गति से वाहन चलाते दिख रहे हैं। इसके बाद भी परिवहन और शिक्षा विभाग भी ध्यान नहीं दे रहा। इसके लिए माता-पिता को भी जागरूक होना होगा।
कई बार शौक मुसीबत का सबब भी बन जाता है। ऐसा ही कुछ रुद्रपुर में भी देखने को मिल रहा है जहां स्कूली बच्चे ड्रेस में वाहनों को सड़क पर दौड़ाते नजर आते हैं। जो अपनी जान को तो खतरे में डाल ही रहे हैं। उनके अभिभावक भी कानूनी पचड़े में फंस रहे हैं। रोजाना स्कूल की छुट्टी के समय छात्र अपने दोस्तों को स्कूटी और बाइक पर बैठाकर बिना हेलमेट के तेज गति से वाहन चलाते देखे जाते हैं।
एक ओर पुलिस स्कूलों में यातायात नियमों के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। वहीं दूसरी ओर स्कूल प्रबंधन खुद ही पुलिस के अभियान को पलीता लगा रहा है। कई स्कूलों में छात्रों के लिए पार्किंग की व्यवस्था तक की गई है जो इस अवैध गतिविधि को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देती है। स्कूल प्रशासन को चाहिए कि वे परिसर में नाबालिगों के लाए गए वाहनों पर सख्ती से रोक लगाएं और इस विषय पर अभिभावकों को भी जागरूक करें।
नाबालिगों के वाहन चलाने पर क्या कहता है कानून?
पुलिस के अनुसार मोटर वाहन अधिनियम के तहत नाबालिग का वाहन चलाना गंभीर अपराध है। अगर कोई नाबालिग दोपहिया या चौपहिया वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है तो वाहन मालिक या अभिभावक को इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है। ऐसे मामलों में 25 हजार रुपये तक का जुर्माना और अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा संबंधित वाहन का रजिस्ट्रेशन एक वर्ष के लिए निलंबित किया जा सकता है। ऐसे मामलों में नाबालिग का 25 वर्ष तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं होगा।
वर्जन
छात्रों को समय-समय पर जागरूक किया जाता है। यदि कोई बच्चा यातायात नियमों का उल्लंघन करता मिला तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों को भी भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। - जितेंद्र चौधरी, पुलिस अधीक्षक क्राइम
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कई बार शौक मुसीबत का सबब भी बन जाता है। ऐसा ही कुछ रुद्रपुर में भी देखने को मिल रहा है जहां स्कूली बच्चे ड्रेस में वाहनों को सड़क पर दौड़ाते नजर आते हैं। जो अपनी जान को तो खतरे में डाल ही रहे हैं। उनके अभिभावक भी कानूनी पचड़े में फंस रहे हैं। रोजाना स्कूल की छुट्टी के समय छात्र अपने दोस्तों को स्कूटी और बाइक पर बैठाकर बिना हेलमेट के तेज गति से वाहन चलाते देखे जाते हैं।
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एक ओर पुलिस स्कूलों में यातायात नियमों के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। वहीं दूसरी ओर स्कूल प्रबंधन खुद ही पुलिस के अभियान को पलीता लगा रहा है। कई स्कूलों में छात्रों के लिए पार्किंग की व्यवस्था तक की गई है जो इस अवैध गतिविधि को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देती है। स्कूल प्रशासन को चाहिए कि वे परिसर में नाबालिगों के लाए गए वाहनों पर सख्ती से रोक लगाएं और इस विषय पर अभिभावकों को भी जागरूक करें।
नाबालिगों के वाहन चलाने पर क्या कहता है कानून?
पुलिस के अनुसार मोटर वाहन अधिनियम के तहत नाबालिग का वाहन चलाना गंभीर अपराध है। अगर कोई नाबालिग दोपहिया या चौपहिया वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है तो वाहन मालिक या अभिभावक को इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है। ऐसे मामलों में 25 हजार रुपये तक का जुर्माना और अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा संबंधित वाहन का रजिस्ट्रेशन एक वर्ष के लिए निलंबित किया जा सकता है। ऐसे मामलों में नाबालिग का 25 वर्ष तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं होगा।
वर्जन
छात्रों को समय-समय पर जागरूक किया जाता है। यदि कोई बच्चा यातायात नियमों का उल्लंघन करता मिला तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों को भी भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। - जितेंद्र चौधरी, पुलिस अधीक्षक क्राइम
