कचरे से कमाल: अनानास के छिलकों से प्लास्टिक प्रदूषण को चुनौती, पंत विवि के शोधकर्ताओं ने बनाई पर्यावरण अनुकूल
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अनानास के छिलकों से प्राप्त सेल्यूलोज और पॉलीलैक्टिक एसिड का उपयोग कर एक पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग फिल्म विकसित की है, जो पारंपरिक प्लास्टिक का विकल्प बन सकती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्लास्टिक प्रदूषण से बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अनानास के छिलकों से प्राप्त सेल्यूलोज और पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) की मदद से पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग फिल्म विकसित की है। यह फिल्म पारंपरिक प्लास्टिक पैकेजिंग का विकल्प बन सकती है। विश्वविद्यालय ने इस तकनीक के लिए पेटेंट आवेदन भी दाखिल कर दिया है।
शोध के दौरान विकसित फिल्म का उपयोग मशरूम की पैकेजिंग में किया गया। परीक्षण में यह फिल्म खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और ताजगी बनाए रखने में प्रभावी साबित हुई। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक खाद्य उद्योग को सुरक्षित, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग का नया विकल्प उपलब्ध करा सकती है।
प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के प्रसंस्करण एवं खाद्य अभियांत्रिकी विभाग में विश्वविद्यालय की शोधार्थी डॉ. प्रिया गोंड ने यह शोध विभागाध्यक्ष डॉ. पीके ओमरे तथा समिति सदस्यों डॉ. आरएन पटेरिया, डॉ. पीसी गोप और डॉ. अनिल कुमार के मार्गदर्शन में पूरा किया। शोध का उद्देश्य कृषि अपशिष्ट का वैज्ञानिक उपयोग कर ऐसी पैकेजिंग सामग्री विकसित करना था, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा भी बनाए रख सके।
ऐसे तैयार हुई पैकेजिंग फिल्म
डॉ. प्रिया गोंड ने बताया कि सबसे पहले अनानास प्रसंस्करण उद्योग से प्राप्त छिलकों से उच्च गुणवत्ता का सेल्यूलोज निकाला गया। इसके बाद उसे पॉलीलैक्टिक एसिड के साथ मिलाकर जैव अपघटनीय पैकेजिंग फिल्म तैयार की गई। फिल्म के भौतिक, यांत्रिक, तापीय और सूक्ष्म संरचनात्मक परीक्षणों में इसे पर्याप्त मजबूती, कम जल घुलनशीलता, बेहतर अवरोधक क्षमता और संतोषजनक तापीय स्थिरता वाला पाया गया। साथ ही यह प्राकृतिक रूप से जैव अपघटित होकर प्लास्टिक प्रदूषण कम करने में भी सहायक है।
शोध को मिला राष्ट्रीय सम्मान
विभागाध्यक्ष डॉ. पीके ओमरे ने बताया कि शोध की नवीनता और औद्योगिक उपयोगिता को देखते हुए विकसित तकनीक के पेटेंट के लिए आवेदन किया गया है। इसके अलावा शोध के निष्कर्ष राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए, जहां इसे बेस्ट ओरल प्रेजेंटेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान शोध की वैज्ञानिक गुणवत्ता और खाद्य पैकेजिंग के क्षेत्र में इसके संभावित योगदान को रेखांकित करता है।
प्लास्टिक का प्रभावी विकल्प बनने की क्षमता
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसके कश्यप ने कहा कि पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग की बढ़ती जरूरत को देखते हुए कृषि अपशिष्ट आधारित यह जैव अपघटनीय फिल्म भविष्य में खाद्य उद्योग के लिए प्लास्टिक का प्रभावी विकल्प बन सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के अनुसंधान कृषि अपशिष्ट के मूल्य संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।