UK: डिजिटल ठगी का नया चेहरा...आवाज चुराकर खाते कर रहे साफ, ऐसे खातों से पार हो रही रकम
साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। पार्ट-टाइम जॉब, निवेश के नाम पर अधिक मुनाफा और ऑनलाइन दोस्ती के जाल में लोग फंस रहे हैं। उत्तराखंड पुलिस ने साइबर सुरक्षा पर आधारित नई 'डिजिटल पाठशाला टून्ज' शुरू की है।
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साइबर ठगी का तरीका बदल चुका है। लोग अब डिजीटल जालों में ट्रेप हो रहे हैं। पार्ट-टाइम जॉब, सौ फीसदी लाभ वाले निवेश और ऑनलाइन दोस्ती के नाम पर धोखाधड़ी के केस लगातार सामने आ रहे हैं। ''एआई वॉइस क्लोनिंग'' जैसे हथकंडे अपनाकर ठगी की जा रही है। उत्तराखंड पुलिस ने साइबर सुरक्षा की नई डिजिटल पाठशाला टून्ज शुरु की है।
साइबर ठगी का सबसे खतरनाक पहलू बगैर ओटीपी नंबर के भी बैंक खातों से रकम उड़ाना है। ठगी के लिए फ़ाइलों और स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स का उपयोग किया जा रहा है। फाइलें डाउनलोड करने पर ठगों को खातों का एक्सिस मिल जाता है, जिससे वह खातों में आने वाले ओटीपी खुद पढ़कर रकम ट्रांसफर कर लेते हैं। पेटीएम या फोन पे आदि का केवाईसी वेरिफिकेशन करने के नाम पर ठग सारी डिटेल एकत्र कर लेते हैं। वेरिफिकेशन के नाम पर साइबर ठगो ने काशीपुर के एक सेवानिवृत्त पुलिस कर्मी के खाते से 29 लाख रुपये उड़ा लिए। आधार कार्ड, पेन कार्ड व अन्य जानकारियों के आधार पर ठग फर्जी जीएसटी पंजीकरण भी दर्शा रहे है। फर्माें पर जीएसटी बकाया होने की बात कह कर सेटलमेंट के नाम पर ठगी की जा रही है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेकर ठग सोशल मीडिया से 10-15 सेकंड की आवाज उठाकर एआई क्लोन तैयार करते हैं और फिर दोस्त/रिश्तेदार बनकर कॉल करते हैं। कोई गंभीर इमरजेंसी बताकर रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते हैं।
साइबर ठगी से सावधान कर रही चौकन्नी चाची
साइबर अपराधों को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए एसटीएफ ने उपाय शुरु किए है। ‘चौकन्नी चाची’ अपने अनोखे और मनोरंजक अंदाज में लोगों को आधारकार्ड से जुड़ी जानकारियों के दुरुपयोग व डिजिटल ठगी रोकने के उपायों को लेकर जागरुक कर रही है। आम नागरिक अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं। रातों-रात अमीर बनाने के दावो, गारंटिड रिर्टन और सौ प्रतिशत मुनाफे के झांसे में कतई न फंसे। चौकन्नी चाची समय-समय पर उत्तराखंड पुलिस के इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर नजर आती हैं।
पार्ट-टाइम जॉब के लिए कोई भी कंपनी रजिस्ट्रेशन फीस नहीं मांगती। अनजान लिंक/ऐप डाउनलोड करने से बचे, तुरंत पैसा ट्रांसफर न करें। साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें। -अजय सिंह एसएसपी, एसटीएफ।