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Udham Singh Nagar News: सितारगंज में महिलाएं जैविक हल्दी-मसालों की पैकिंग से बनीं आत्मनिर्भर
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रुद्रपुर। सितारगंज क्षेत्र के भरौनी गांव में उज्ज्वल वन धन विकास केंद्र से जुड़ी महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। यह समूह जैविक तरीके से तैयार हल्दी और अन्य मसालों की पैकिंग कर अपनी आमदनी बढ़ा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
समूह की अध्यक्ष राजवती की अगुवाई में 340 से अधिक महिलाएं इस पहल से जुड़ी हैं। महिलाएं आसपास के गांवों में किसानों को हल्दी और धनिया की जैविक खेती के लिए जागरूक करती हैं। वे किसानों से उपज खरीदकर उसकी प्रोसेसिंग और पैकिंग स्वयं करती हैं। तैयार उत्पादों को जिले और राज्य भर में लगने वाले मेलों व आयोजनों में स्टॉल लगाकर बेचा जाता है।
इन उत्पादों की मांग चंपावत, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिलों से विशेष रूप से अधिक है। बिक्री से प्राप्त आय को सभी महिलाओं में समान रूप से बांटा जाता है। इससे प्रत्येक महिला को मासिक लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक की बचत हो रही है। यह बचत उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है।
समूह की शुरुआत करीब छह साल पहले हुई थी। शासन ने समूह की सफलता को देखते हुए पैकिंग के लिए कई मशीनें भी उपलब्ध कराई हैं।
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स्वरोजगार और जैविक खेती को बढ़ावा
समूह की अध्यक्ष राजवती का कहना है कि वे महिलाओं को रोजगार के साथ आत्मविश्वास भी दे रही हैं। उनकी कोशिश है कि अधिक से अधिक महिलाएं इस पहल से जुड़ें। इसका एक प्रमुख लक्ष्य जैविक खेती को बढ़ावा देना भी है।
समूह ने छह साल पहले इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के लिए स्वरोजगार का जरिया बनने की उम्मीद नहीं की थी।
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समूह की अध्यक्ष राजवती की अगुवाई में 340 से अधिक महिलाएं इस पहल से जुड़ी हैं। महिलाएं आसपास के गांवों में किसानों को हल्दी और धनिया की जैविक खेती के लिए जागरूक करती हैं। वे किसानों से उपज खरीदकर उसकी प्रोसेसिंग और पैकिंग स्वयं करती हैं। तैयार उत्पादों को जिले और राज्य भर में लगने वाले मेलों व आयोजनों में स्टॉल लगाकर बेचा जाता है।
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इन उत्पादों की मांग चंपावत, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिलों से विशेष रूप से अधिक है। बिक्री से प्राप्त आय को सभी महिलाओं में समान रूप से बांटा जाता है। इससे प्रत्येक महिला को मासिक लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक की बचत हो रही है। यह बचत उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है।
समूह की शुरुआत करीब छह साल पहले हुई थी। शासन ने समूह की सफलता को देखते हुए पैकिंग के लिए कई मशीनें भी उपलब्ध कराई हैं।
स्वरोजगार और जैविक खेती को बढ़ावा
समूह की अध्यक्ष राजवती का कहना है कि वे महिलाओं को रोजगार के साथ आत्मविश्वास भी दे रही हैं। उनकी कोशिश है कि अधिक से अधिक महिलाएं इस पहल से जुड़ें। इसका एक प्रमुख लक्ष्य जैविक खेती को बढ़ावा देना भी है।
समूह ने छह साल पहले इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के लिए स्वरोजगार का जरिया बनने की उम्मीद नहीं की थी।
