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Uttarkashi News: ज्ञानसू में गड्ढों में तब्दील हुआ गंगोत्री नेशनल हाईवे
Sun, 12 Jul 2026 06:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sun, 12 Jul 2026 06:22 PM IST
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ज्ञानसू क्षेत्र में गंगोत्री हाईवे पर बने गढ्डे। संवाद
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ज्ञानसू से तेखला तक जून में कराया गया था 90 लाख डामरीकरण
जगह-जगह गहरे गड्ढे होने से राहगिरों के साथ वाहन चालकों चलना हुआ मुश्किल
उत्तरकाशी। जिला मुख्यालय से सटे ज्ञानसू कस्बे में गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग की बदहाल स्थिति एक बार फिर लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। करीब एक वर्ष पहले जून माह में 90 लाख रुपये की लागत से ज्ञानसू से तेखला तक कराया गया डामरीकरण उखड़ चुका है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं जिससे राहगिरों के साथ वाहन चालकों का चलना मुश्किल हो गया है।
हाईवे पर कई गड्ढे इतने बड़े हैं कि उनमें दोपहिया वाहन तक समा सकता है। पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से जर्जर इस सड़क के डामरीकरण से राहत की उम्मीद थी, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे।
कुछ ही महीनों में सड़क की परत उखड़ने लगी और अब दूसरे मानसून में हालात पहले से भी बदतर हो गए हैं। लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष बरसात के बाद बीआरओ ने गड्ढों की स्थायी मरम्मत करने के बजाय उनमें मिट्टी भरकर खानापूर्ति की थी। इससे कुछ समय के लिए आवागमन सुचारु हुआ लेकिन मिट्टी उड़ने से धूल की समस्या बढ़ी और इस वर्ष बारिश में वह भी बह गई।
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नतीजतन सड़क फिर बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई है। पालिका सभासद मनीष पंवार, स्थानीय निवासी आनंद पंवार समेत अन्य लोगों ने बीआरओ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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जगह-जगह गहरे गड्ढे होने से राहगिरों के साथ वाहन चालकों चलना हुआ मुश्किल
उत्तरकाशी। जिला मुख्यालय से सटे ज्ञानसू कस्बे में गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग की बदहाल स्थिति एक बार फिर लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। करीब एक वर्ष पहले जून माह में 90 लाख रुपये की लागत से ज्ञानसू से तेखला तक कराया गया डामरीकरण उखड़ चुका है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं जिससे राहगिरों के साथ वाहन चालकों का चलना मुश्किल हो गया है।
हाईवे पर कई गड्ढे इतने बड़े हैं कि उनमें दोपहिया वाहन तक समा सकता है। पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से जर्जर इस सड़क के डामरीकरण से राहत की उम्मीद थी, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे।
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कुछ ही महीनों में सड़क की परत उखड़ने लगी और अब दूसरे मानसून में हालात पहले से भी बदतर हो गए हैं। लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष बरसात के बाद बीआरओ ने गड्ढों की स्थायी मरम्मत करने के बजाय उनमें मिट्टी भरकर खानापूर्ति की थी। इससे कुछ समय के लिए आवागमन सुचारु हुआ लेकिन मिट्टी उड़ने से धूल की समस्या बढ़ी और इस वर्ष बारिश में वह भी बह गई।
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नतीजतन सड़क फिर बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई है। पालिका सभासद मनीष पंवार, स्थानीय निवासी आनंद पंवार समेत अन्य लोगों ने बीआरओ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।