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Uttarkashi News: यमुनोत्री हेलिपैड के सेफ्टी ऑडिट की तैयारी, हेली सेवा पर फिर उम्मीद
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- डीजीसीए से अनुमति न मिलने के बाद प्रशासन ने यूकाडा को लिखा पत्र, गंगोत्री में भी इस साल हेलिपैड संचालन अधर में
विपिन नेगी
उत्तरकाशी। जिला प्रशासन की ओर से यमुनोत्री धाम में गरुड़गंगा के समीप बने हेलिपैड के सेफ्टी ऑडिट के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण को पत्र लिखा गया है। नागर विमानन महानिदेशालय की ओर से धाम के हेलिपैड में हेली सेवा शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई थी। इस पर यमुनोत्री मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन से इस पर एक बार फिर विचार करने की मांग की थी। उसके बाद प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई की गई है।
करीब डेढ़ वर्ष यमुनोत्री धाम में गरुणगंगा के समीप 60 लाख की लागत से हेलिपैड का निर्माण किया गया। उसके बाद बीते वर्ष अप्रैल में सीएम के हेलीकॉप्टर ने वहां पर लैंडिग और टेकऑफ का अभ्यास किया। साथ ही सेना के हेलिकॉप्टर ने भी वहां पर रेकी की थी। इससे लोगों को उम्मीद जगी कि गत वर्ष की चारधाम यात्रा में वहां पर हेली सेवा शुरू हो जाएग लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस बीच यूकाडा की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर नागर विमानन महानिदेशालय की ओर से सुरक्षा और अन्य कारणों से वहां पर हेली सेवा शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद यमुनोत्री मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन से आपदा और यात्रियों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए वहां पर हेली सेवा को शुरू करने की मांग की। क्योंकि यमुनोत्री धाम पहुंचने के लिए पांच किमी की खड़ी पैदल चढ़ाई को पार करना पड़ता है। जिलाधिकारी की ओर से यूकाडा को यमुनोत्री हेलिपैड के सेफ्टी ऑडिट करवाने के लिए पत्र लिखा गया है। दूसरी ओर गंगोत्री धाम में भी इस वर्ष हेलिपैड का प्रयोग नहीं हो पाएगा क्योंकि वहां पर अभी संचालन के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय केंद्र सरकार की अनुमति नहीं मिल पाई है। इसलिए गंगोत्री धाम की यात्रा का पूरा दबाव इस वर्ष झाला स्थित हेलिपैड पर रहेगा। क्योंकि हर्षिल हेलिपैड गत वर्ष की आपदा के दौरान भागीरथी नदी में डूब गया था। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि यमुनोत्री हेलिपैड के सेफ्टी ऑडिट के लिए यूकाडा को पत्र लिखा गया है। साथ ही गंगोत्री धाम की यात्रा के लिए झाला हेलिपैड का प्रयोग किया जाएगा।
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उत्तरकाशी। जिला प्रशासन की ओर से यमुनोत्री धाम में गरुड़गंगा के समीप बने हेलिपैड के सेफ्टी ऑडिट के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण को पत्र लिखा गया है। नागर विमानन महानिदेशालय की ओर से धाम के हेलिपैड में हेली सेवा शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई थी। इस पर यमुनोत्री मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन से इस पर एक बार फिर विचार करने की मांग की थी। उसके बाद प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई की गई है।
करीब डेढ़ वर्ष यमुनोत्री धाम में गरुणगंगा के समीप 60 लाख की लागत से हेलिपैड का निर्माण किया गया। उसके बाद बीते वर्ष अप्रैल में सीएम के हेलीकॉप्टर ने वहां पर लैंडिग और टेकऑफ का अभ्यास किया। साथ ही सेना के हेलिकॉप्टर ने भी वहां पर रेकी की थी। इससे लोगों को उम्मीद जगी कि गत वर्ष की चारधाम यात्रा में वहां पर हेली सेवा शुरू हो जाएग लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस बीच यूकाडा की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर नागर विमानन महानिदेशालय की ओर से सुरक्षा और अन्य कारणों से वहां पर हेली सेवा शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद यमुनोत्री मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन से आपदा और यात्रियों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए वहां पर हेली सेवा को शुरू करने की मांग की। क्योंकि यमुनोत्री धाम पहुंचने के लिए पांच किमी की खड़ी पैदल चढ़ाई को पार करना पड़ता है। जिलाधिकारी की ओर से यूकाडा को यमुनोत्री हेलिपैड के सेफ्टी ऑडिट करवाने के लिए पत्र लिखा गया है। दूसरी ओर गंगोत्री धाम में भी इस वर्ष हेलिपैड का प्रयोग नहीं हो पाएगा क्योंकि वहां पर अभी संचालन के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय केंद्र सरकार की अनुमति नहीं मिल पाई है। इसलिए गंगोत्री धाम की यात्रा का पूरा दबाव इस वर्ष झाला स्थित हेलिपैड पर रहेगा। क्योंकि हर्षिल हेलिपैड गत वर्ष की आपदा के दौरान भागीरथी नदी में डूब गया था। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि यमुनोत्री हेलिपैड के सेफ्टी ऑडिट के लिए यूकाडा को पत्र लिखा गया है। साथ ही गंगोत्री धाम की यात्रा के लिए झाला हेलिपैड का प्रयोग किया जाएगा।
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