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Uttarkashi News: मांडो गदेरे में सुरक्षात्मक कार्यों पर उठे सवाल
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दो से तीन फीट की वायरक्रेट दीवार लगाकर कर दी गई इतिश्री
गदेरे में पड़े मलबे को चैनालाइज करने का किया जा रहा है दावा
उत्तरकाशी। मांडो गांव के गदेरे में सिंचाई विभाग की ओर से किए गए सुरक्षात्मक कार्यों पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि वहां पर मात्र दो से तीन फीट की वायरक्रेट दीवार लगाकर इतिश्री कर दिया गया है। साथ ही विभाग की ओर से गदेरे में पड़े मलबे को चैनालाइज करने का दावा किया जा रहा है लेकिन वहां पर मलबा अभी भी उसी तरह पसरा हुआ है।
मांडो गांव के नरेंद्र चौहान, रविंद्र गुसाईं, प्रीतम चौहान, इंद्रेश उनियाल ने कहा कि वर्ष 2021 में मांडो गदेरे में आई आपदा के कारण तीन लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। साथ ही गांव के कई घरों को अभी भी खतरा बना हुआ है। उसके बाद सिंचाई विभाग की ओर से वहां पर सुरक्षात्मक कार्य किए गए लेकिन वह भी पूरी सुरक्षा नहीं दे पाए।
ग्रामीणों की मांग के बाद अब प्रशासन की ओर से सिंचाई और लघु सिंचाई विभाग को वहां पर सुरक्षात्मक कार्य और गदेरे में हौज बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। सिंचाई विभाग की ओर से वहां पर कुछ दिन पूर्व चैनालाइज का कार्य और करीब सात लाख की लागत से वायरक्रेट दीवार लगाने का कार्य किया गया लेकिन उसमें मात्र 20 से तीस मीटर लंबी दीवारों के साथ की करीब तीन फीट ऊंची दीवार लगाई गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वहां पर मलबा अभी भी पड़ा हुआ है। वह कभी भी बरसात में खतरा बना सकता है। हल्की सी बरसात में वह सड़क पर बहने के बाद घरों में मलबा घुसता रहता है। साथ ही जो दीवारें लगाई गई हैं, उनसे मानसून में किसी भी प्रकार की सुरक्षा नहीं हो सकती है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता गौरव बहुगुणा ने बताया कि अभी वहां पर 20 वायरक्रेट दीवार ओर लगनी है। किसी विवाद के कारण कार्य रुका हुआ है।
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गदेरे में पड़े मलबे को चैनालाइज करने का किया जा रहा है दावा
उत्तरकाशी। मांडो गांव के गदेरे में सिंचाई विभाग की ओर से किए गए सुरक्षात्मक कार्यों पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी व्यक्त की है। ग्रामीणों का कहना है कि वहां पर मात्र दो से तीन फीट की वायरक्रेट दीवार लगाकर इतिश्री कर दिया गया है। साथ ही विभाग की ओर से गदेरे में पड़े मलबे को चैनालाइज करने का दावा किया जा रहा है लेकिन वहां पर मलबा अभी भी उसी तरह पसरा हुआ है।
मांडो गांव के नरेंद्र चौहान, रविंद्र गुसाईं, प्रीतम चौहान, इंद्रेश उनियाल ने कहा कि वर्ष 2021 में मांडो गदेरे में आई आपदा के कारण तीन लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। साथ ही गांव के कई घरों को अभी भी खतरा बना हुआ है। उसके बाद सिंचाई विभाग की ओर से वहां पर सुरक्षात्मक कार्य किए गए लेकिन वह भी पूरी सुरक्षा नहीं दे पाए।
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ग्रामीणों की मांग के बाद अब प्रशासन की ओर से सिंचाई और लघु सिंचाई विभाग को वहां पर सुरक्षात्मक कार्य और गदेरे में हौज बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। सिंचाई विभाग की ओर से वहां पर कुछ दिन पूर्व चैनालाइज का कार्य और करीब सात लाख की लागत से वायरक्रेट दीवार लगाने का कार्य किया गया लेकिन उसमें मात्र 20 से तीस मीटर लंबी दीवारों के साथ की करीब तीन फीट ऊंची दीवार लगाई गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वहां पर मलबा अभी भी पड़ा हुआ है। वह कभी भी बरसात में खतरा बना सकता है। हल्की सी बरसात में वह सड़क पर बहने के बाद घरों में मलबा घुसता रहता है। साथ ही जो दीवारें लगाई गई हैं, उनसे मानसून में किसी भी प्रकार की सुरक्षा नहीं हो सकती है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता गौरव बहुगुणा ने बताया कि अभी वहां पर 20 वायरक्रेट दीवार ओर लगनी है। किसी विवाद के कारण कार्य रुका हुआ है।