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Uttarkashi News: सांवणी-सटूड़ी गांव जल्द जुड़ेंगे सड़क से
Thu, 06 Aug 2026 05:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Thu, 06 Aug 2026 05:42 PM IST
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2.90 करोड़ से बनेगा पांच किमी मोटर मार्ग
पुरोला। मोरी विकासखंड के सुदूरवर्ती सांवणी और सटूड़ी गांवों के ग्रामीणों का दशकों पुराना सड़क का सपना अब साकार होने की ओर बढ़ गया है। लोनिवि जखोल-फिताड़ी मोटर मार्ग के बैंचा से सांवणी-सटूड़ी तक पांच किलोमीटर मोटर मार्ग का निर्माण 2.90 करोड़ की लागत से कराने जा रहा है।
विभाग पिछले दो वर्षों में सड़क का सर्वेक्षण, भूमि हस्तांतरण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी कर चुका है। सड़क बनने से सांवणी और सटूड़ी गांवों के 373 परिवार पहली बार मोटर मार्ग से जुड़ेंगे। सांवणी पहुंचने के लिए जखोल से सुपिन नदी पुल तक करीब दो किलोमीटर उतराई और फिर तीन किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई तय करनी पड़ती है।
वहीं सटूड़ी के लिए पांव गांव से दो किलोमीटर पैदल चलकर सुपिन नदी के लकड़ी पुल तक पहुंचने के बाद चार किलोमीटर कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। बरसात और बर्फबारी में यह मार्ग और अधिक जोखिमभरा हो जाता है। पूर्व प्रधान ज्ञान सिंह रावत का कहना है कि सड़क न होने से बीमारों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों की शिक्षा, कृषि और बागवानी उत्पाद बाजार तक ले जाने तथा रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भारी दिक्कतें आती हैं। अधिशासी अभियंता दीपक नेगी ने बताया कि पहली निविदा में कोई टेंडर नहीं मिला, इसलिए जल्द दोबारा निविदाएं जारी की जाएंगी।
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पुरोला। मोरी विकासखंड के सुदूरवर्ती सांवणी और सटूड़ी गांवों के ग्रामीणों का दशकों पुराना सड़क का सपना अब साकार होने की ओर बढ़ गया है। लोनिवि जखोल-फिताड़ी मोटर मार्ग के बैंचा से सांवणी-सटूड़ी तक पांच किलोमीटर मोटर मार्ग का निर्माण 2.90 करोड़ की लागत से कराने जा रहा है।
विभाग पिछले दो वर्षों में सड़क का सर्वेक्षण, भूमि हस्तांतरण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी कर चुका है। सड़क बनने से सांवणी और सटूड़ी गांवों के 373 परिवार पहली बार मोटर मार्ग से जुड़ेंगे। सांवणी पहुंचने के लिए जखोल से सुपिन नदी पुल तक करीब दो किलोमीटर उतराई और फिर तीन किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई तय करनी पड़ती है।
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वहीं सटूड़ी के लिए पांव गांव से दो किलोमीटर पैदल चलकर सुपिन नदी के लकड़ी पुल तक पहुंचने के बाद चार किलोमीटर कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। बरसात और बर्फबारी में यह मार्ग और अधिक जोखिमभरा हो जाता है। पूर्व प्रधान ज्ञान सिंह रावत का कहना है कि सड़क न होने से बीमारों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों की शिक्षा, कृषि और बागवानी उत्पाद बाजार तक ले जाने तथा रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भारी दिक्कतें आती हैं। अधिशासी अभियंता दीपक नेगी ने बताया कि पहली निविदा में कोई टेंडर नहीं मिला, इसलिए जल्द दोबारा निविदाएं जारी की जाएंगी।
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