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आने वाले समय में फॉरेंसिक साइंस का बढ़ेगा दायरा : डॉ राजेश
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Wed, 22 Apr 2026 06:12 PM IST
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श्रीमती मंजीरा देवी विवि में फॉरेंसिक साइंस और कॅरिअर के अवसरों में इसकी संभावनाओं पर सेमिनार
उत्तरकाशी। श्रीमती मंजीरा देवी विश्वविद्यालय में फॉरेंसिक साइंस और कॅरिअर के अवसरों में इसकी संभावनाओं पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य वक्ता व फॉरेंसिक साइंस के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि आने वाले समय में फॉरेंसिक साइंस का दायरा और अधिक व्यापक होगा। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों के द्वार खोल रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलाधिपति डॉ. हरिशंकर नौटियाल, गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं विश्वविद्यालय के एडवाइजर प्रो. डॉ. जेपी पचौरी, शिक्षाविद डॉ. योगेश कुमार शर्मा व मैनेजिंग डायरेक्टर अधिवक्ता पवन नौटियाल ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की शुरुआत में कुलपति डॉ. भगवन नौटियाल ने कहा कि ऐसे सेमिनार विद्यार्थियों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक करियर क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि सरकारी फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं, पुलिस विभाग, न्यायालयों, केंद्रीय जांच एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों एवं निजी क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। साथ ही साइबर अपराधों में वृद्धि के कारण साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की आवश्यकता तेजी से बढ़ी है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार यादव ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से अपराधों की जांच को अधिक सटीक, निष्पक्ष और प्रमाणिक बनाना है। संचालन रजिस्ट्रार डॉ. कपिल मोहन एवं डॉ. शंभू प्रसाद नौटियाल ने किया। इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी जीसी मधुवाल, डॉ. राघवेंद्र उनियाल आदि उपस्थित रहे।
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उत्तरकाशी। श्रीमती मंजीरा देवी विश्वविद्यालय में फॉरेंसिक साइंस और कॅरिअर के अवसरों में इसकी संभावनाओं पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य वक्ता व फॉरेंसिक साइंस के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि आने वाले समय में फॉरेंसिक साइंस का दायरा और अधिक व्यापक होगा। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों के द्वार खोल रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलाधिपति डॉ. हरिशंकर नौटियाल, गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं विश्वविद्यालय के एडवाइजर प्रो. डॉ. जेपी पचौरी, शिक्षाविद डॉ. योगेश कुमार शर्मा व मैनेजिंग डायरेक्टर अधिवक्ता पवन नौटियाल ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की शुरुआत में कुलपति डॉ. भगवन नौटियाल ने कहा कि ऐसे सेमिनार विद्यार्थियों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक करियर क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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मुख्य वक्ता डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि सरकारी फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं, पुलिस विभाग, न्यायालयों, केंद्रीय जांच एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों एवं निजी क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। साथ ही साइबर अपराधों में वृद्धि के कारण साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की आवश्यकता तेजी से बढ़ी है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार यादव ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से अपराधों की जांच को अधिक सटीक, निष्पक्ष और प्रमाणिक बनाना है। संचालन रजिस्ट्रार डॉ. कपिल मोहन एवं डॉ. शंभू प्रसाद नौटियाल ने किया। इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी जीसी मधुवाल, डॉ. राघवेंद्र उनियाल आदि उपस्थित रहे।

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