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उत्तराखंड: मां छोड़ गई, पिता की हालत ठीक नहीं, भीख मांगकर पालती थीं दादी, अब लौटी मासूमों की आवाज और मुस्कान

Mon, 19 Oct 2026 01:24 PM IST
Renu Saklani विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी. उत्तरकाशी
विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी. उत्तरकाशी Published by: Renu Saklani Updated Mon, 19 Oct 2026 01:24 PM IST
सार

उत्तरकाशी के पुरोला में मुश्किल हालात के बीच जीवन बिता रहे दो मासूम बच्चों की जिंदगी में अब उम्मीद की नई किरण जगी है। बाल कल्याण समिति के प्रयासों से चार वर्षीय अनुज और तीन वर्षीय अमीषा को संरक्षण और बेहतर भविष्य की दिशा मिली है।

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Two young children regain their voice and smile after child welfare committee intervention Uttarkashi
बाल कल्याण समिति की ओर से फिट फेसिलिटी के तहत हो रहा बच्चों का संरक्षण। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

जनपद की बाल कल्याण समिति के प्रयासों से पुरोला के दो मासूम बच्चों की आवाज और मुस्कान लौट आई है। एक वर्ष पूर्व ये बच्चे बोलना नहीं जानते थे और खामोशी में जीवन बिता रहे थे। जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष पुष्पा चौहान ने बताया कि जून 2025 में विकासखंड पुरोला से एक संवेदनशील मामला सामने आया था।

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चार वर्षीय अनुज और तीन वर्षीय अमीषा की मां घर छोड़कर जा चुकी थी। उनके पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ थे। बच्चों की अस्सी वर्षीय मूकबधिर दादी भीख मांगकर उनका पेट पालती थीं। समिति ने स्थिति को देखते हुए मासूमों को तुरंत रेस्क्यू कर देखभाल संरक्षण हेतु पुनर्वासित करने की योजना बनाई। पहाड़ों में बाल संरक्षण के लिए चार्ट केयर, फिट फैसिलिटी और फोस्टर केयर की सुविधा नहीं थी।जिस पर बाल कल्याण समिति ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत अधिकारों का प्रयोग किया।
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एक विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसी को फिट फैसिलिटी घोषित किया गया। नवंबर 2025 में दोनों मासूमों को रेस्क्यू कर संस्थान में सुरक्षित पहुंचाया गया। एक वर्ष बाद अब ये बच्चे बोलना सीख गए हैं और सामान्य बच्चों की तरह खेलने कूदने सहित आंगनबाड़ी केंद्र भी जा  रहे हैं। समिति ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पुरोला के उप जिलाधिकारी से बच्चों के पिता की जमीन बेचने पर पूर्ण रोक लगाने का अनुरोध किया है।

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