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Bakrid 2026 Qurbani Rules: A war of words broke out in Bengal over the sacrifice, Minister Agnimitra Paul told
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Bakrid 2026 Qurbani Rules: बंगाल में कुर्बानी को लेकर छिड़ी जुबानी जंग, मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बताया सरकार
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Thu, 21 May 2026 12:55 AM IST
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पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा, "हमारे राज्य के नियम बहुत सख्त हैं। हम लोग ये भी नहीं कह रहे हैं कि जो व्यपार चल रहा है उसे बंद करना है लेकिन नियम में लिखा है कि 14 साल से कम आयु के जानवर को काटा नहीं जाएगा। जो जानवर एक दम अस्वस्थ्य है या विकलांग है उसके लिए प्रमाण पत्र देना होगा। प्रमाण पत्र के बाद कोई दिक्कत नहीं है। 1950 के हमारे राज्य के नियम बहुत सख्त हैं। ये दूसरे राज्यों में नहीं है। अभी तक ये नियम लागू नहीं हुए थे लेकिन हमारी सरकार में नियम लागू होंगे। हम गाय को माता मानते हैं इसलिए ये भावनात्मक मुद्दा भी है।"
अग्निमित्रा पॉल ने पश्चिम बंगाल में पशु वध से जुड़े कानूनों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में 1950 से लागू West Bengal Animal Slaughter Control Act, 1950 के नियम काफी सख्त हैं और अब इन नियमों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य किसी वैध व्यापार को पूरी तरह बंद करना नहीं है, बल्कि कानून के अनुसार पशुओं के वध की प्रक्रिया को नियंत्रित करना है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 14 वर्ष से कम आयु वाले पशुओं को काटने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके अलावा यदि कोई पशु गंभीर रूप से बीमार, विकलांग या स्थायी रूप से काम करने में असमर्थ है, तभी उसे वध के लिए अनुमति मिल सकती है, और इसके लिए अधिकृत पशु चिकित्सक तथा स्थानीय प्रशासन से प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रमाण पत्र मिलने के बाद किसी प्रकार की कानूनी दिक्कत नहीं होगी। यह कानून विशेष रूप से गाय, बैल, बछड़े और भैंस जैसे पशुओं पर लागू होता है। अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में यह नियम लंबे समय से मौजूद थे, लेकिन पहले इनका सख्ती से पालन नहीं कराया गया। अब प्रशासन इन प्रावधानों को गंभीरता से लागू करेगा ताकि अवैध पशु वध को रोका जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के कई राज्यों में अलग-अलग प्रकार के पशु संरक्षण कानून हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल का कानून अपने आप में काफी कठोर माना जाता है। बयान के दौरान उन्होंने गाय को “माता” बताते हुए कहा कि यह केवल कानूनी नहीं बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक मुद्दा भी है, क्योंकि देश के बड़े वर्ग की धार्मिक आस्था गाय से जुड़ी हुई है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। एक पक्ष इसे पशु संरक्षण और कानून व्यवस्था से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि इससे कुछ समुदायों के पारंपरिक व्यवसाय और धार्मिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि कानून में यह प्रावधान साफ है कि बूढ़े या स्थायी रूप से अक्षम पशुओं के लिए प्रमाणित अनुमति के बाद वध किया जा सकता है।
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