बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर में पिछले चार दशक से भी अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक मंदिर की कुल संपत्ति, प्राप्त चढ़ावे, सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य दान का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसे लेकर अब चर्चा तेज हो गई है कि क्या अयोध्या के राम मंदिर की तरह यहां भी चढ़ावे में गड़बड़ी की आशंका है? जबकि वर्ष 2020 में अदालत ने मंदिर की संपत्ति का ब्यौरा जल्द से जल्द सार्वजनिक करने का आदेश भी दिया था।
बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी का मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, लेकिन मंदिर की संपत्ति को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका स्पष्ट जवाब प्रशासन के पास भी नहीं दिख रहा। वर्ष 1981 के बाद से मंदिर की संपत्ति का सत्यापन नहीं हुआ। वर्ष 2020 में अदालत ने 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आदेश दिया था, लेकिन वर्षों बाद भी न तो जांच पूरी होने की जानकारी सामने आई और न ही संपत्ति का आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर देरी की वजह क्या है?
मां दंतेश्वरी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बस्तर की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। दशकों से यहां श्रद्धालु सोने-चांदी के आभूषण, मुकुट, हार, सिक्के और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं देवी को अर्पित करते आ रहे हैं। स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी संपत्ति का नियमित सत्यापन और सुरक्षित रिकॉर्ड होना चाहिए। चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मंदिर के खजाने का अद्यतन और सार्वजनिक हिसाब सामने नहीं आया है।
मुख्य पुजारी कृष्ण कुमार पाढ़ी ने कहा कि यही वजह है कि अब मंदिर से जुड़े कई लोग और श्रद्धालु सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब वर्षों तक संपत्ति का सत्यापन नहीं होगा और अदालत के निर्देश के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं होगी, तो आशंकाएं जन्म लेना स्वाभाविक है। हालांकि अब तक किसी सक्षम जांच एजेंसी या प्रशासन ने यह पुष्टि नहीं की है कि मंदिर के जेवरात या संपत्ति की चोरी हुई है, लेकिन पारदर्शिता की कमी ने संदेह जरूर पैदा किया है।
राजगुरु नवीन ठाकुर ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मंदिर की पूरी संपत्ति सुरक्षित है तो उसका अद्यतन रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? सत्यापन पूरा हुआ या नहीं? यदि हुआ तो रिपोर्ट कहां है? यदि नहीं हुआ तो छह वर्ष पहले दिए गए अदालत के आदेश का पालन अब तक क्यों नहीं हुआ? सवाल और बड़ा तब हो जाता है, जब मंदिर की संपत्ति किसी व्यक्ति या विभाग की नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की धरोहर मानी जाती है। यह मामला केवल सोने-चांदी या बहुमूल्य आभूषणों का नहीं, बल्कि आस्था, जवाबदेही और पारदर्शिता का है। जब अदालत का आदेश भी वर्षों तक फाइलों में दबा रह जाए तो सवाल उठना स्वाभाविक है।