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During the Harappan culture, bricks measuring one and three-quarter feet in length were used; four different sizes of bricks have been discovered.
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हडप्पा संस्कृति के समय होती थी पौने दो फीट लंबी ईंट, चार तरह की ईंटों के आकार मिले
सिंधु सभ्यता कालीन हड़प्पा संस्कृति में लोग चार तरह की ईंट का उपयोग करते थे। खोदाई के दौरान यहां टीलों से चार आकार की ईंटों के नमूने मिले हैं। जिसमें सबसे बड़ी ईंट करीब पौने दो फीट लंबी है। सभी ईंट अनुपात के हिसाब बनाई जाती थी। मकानों के बाहरी हिस्सों में बड़े आकार की ईंटों का उपयोग किया जाता था। अंदर के हिस्सों में छोटी ईंट मिलती हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि सुरक्षा के लिहाज से बाहरी हिस्सों में बड़ी ईंटों प्रयोग होता था।
राखीगढ़ी में खोदाई के दौरान मिली करीब दो फीट लंबी ईंट लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। आम जन से विशेषज्ञों तक सभी को राखीगढ़ी संक्षेप में बेहतर तरीके से समझाने के लिए स्टाल नंबर एक पर कृत्रिम उत्खनन बनाया गया था। जिसमें दिखाया गया कि कितने स्तर की खोदाई पर क्या क्या मिला है। खोदाई के दौरान मिले सामान, कंकालों, बर्तन, मिट्टी के गहनों , ईंट को यहां रखा गया है। यहां रखी गई ईंट वास्तविक ईंट थी। जो खोदाई के समय मिली थी। खोदाई के दौरान मिले चूल्हे के आकार, शौचालय, पानी की निकासी के लिए बनी नालियों को भी कृत्रिम तौर पर तैयार दिखाया गया। इस बारे में जानकारी देने के लिए इतिहास विभाग के शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई थी।
इतिहास प्रवक्ता ने बताया कि मनोज कुमार ने बताया कि हड़प्पा और मोहनजोदड़ो नगरों में सुव्यवस्थित सड़कें, चौकोर नगर योजना, और जल निकासी की अच्छी व्यवस्था थी। ईंटों का उपयोग समान आकार और माप के साथ किया जाता था। जिससे मजबूत और टिकाऊ भवन बनते थे। जल प्रबंधन में कुएं, जलाशय, और नालियों की व्यवस्था थी। जिसमें अलग अलग आकार की ईंटाें का उपयोग मिला है।हमने राखीगढ़ी में जैसा खोदाई में मिला हमने उसका डेमो तैयार किया है। हमने सभी टीलों की खोदाई से मिले सामान को यहां दिखाया है। जिससे समझने में काफी आसानी होती है।
ईंट जितनी मोटी थी उसके दोगुना चौड़ी होती थी। जितनी चौड़ी ईंट थी उसकी दोगुनी लंबी होती थी। सभी ईंट के निर्माण में एक अनुपात का फार्मूला मिला है। जिसमें एक ,दो ,चार का अनुपात उपयोग किया गया है। इन ईंट पर कुछ लिखा नहीं है। यह चौरस पत्थर के आकार में तैयार की गई मिली हैं। जरूरत के अनुसार ईंट तैयार की जाती थी।
हडप्पा काल में ईंटों के मकान के प्रमाण मिले हैं। जिसमें ईंटों को पकाया जाता था। ईंटों के साइज अलग अलग होते थे। कुएं में पयोग की गई ईंटों को खास डिजायन से बनाया जाता था। मकान निर्माण में उपयोग की गई ईंटों का आकार अलग था। जिसमें बाहरी हिस्सों में बड़े आकार की ईंट लगाई जाती थी। संभवत यह सुरक्षा कारणों से किया जाता था। उस समय के मिट्टी के गहनों के प्रमाण भी मिले हैं।
डॉ. महेंद्र सिंह, विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग,दयानंद महाविद्यालय ,हिसार
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