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बिलासपुर: गोबिंदसागर झील में छोड़े गए कतला और सिल्वर कार्प के 2.05 लाख बच्चे, मछुआरों को होगा लाभ
Ankesh Dogra
Updated Sun, 18 Oct 2026 05:16 PM IST
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गोबिंदसागर झील में मछली उत्पादन बढ़ाने और स्थानीय मछुआरों की आजीविका को मजबूत करने के लिए मत्स्य पालन विभाग ने मछली बीज डालने का अभियान शुरू किया है। अभियान के पहले चरण में बिलासपुर के लुहणू में आयोजित कार्यक्रम के दौरान झील में कतला और सिल्वर कार्प प्रजातियों की कुल 2,05,866 छोटी मछलियां छोड़ी गईं। इन्हें पश्चिम बंगाल के कोलकाता से मंगवाया गया था।
विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से आने वाले समय में झील में मछलियों की उपलब्धता बढ़ेगी और मत्स्य उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे मछली पकड़ने के व्यवसाय से जुड़े स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ मिल सकता है।
मत्स्य पालन विभाग के निदेशक ओम कांत ठाकुर ने बताया कि विभाग हर वर्ष प्रदेश के बड़े जलाशयों में मछली बीज डालता है। इसके तहत गोबिंदसागर झील, पौंग बांध, कोल बांध और चमेरा बांध सहित अन्य जलाशयों में चरणबद्ध तरीके से मछलियों के बच्चे छोड़े जाते हैं।
उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य जलाशयों में मछलियों की संख्या बढ़ाना, मत्स्य उत्पादन को बनाए रखना और इससे जुड़े लोगों की आजीविका को सहारा देना है। विभाग हर वर्ष ठेकेदारों के माध्यम से प्रदेश के बाहर से मछली बीज मंगवाता है।
निदेशक के अनुसार, गोबिंदसागर झील सहित प्रदेश के बड़े जलाशयों में बेहतर गुणवत्ता वाला मछली बीज डालने की मांग लंबे समय से उठती रही है। मछुआरे और मत्स्य पालक समितियां भी चाहती हैं कि जलाशयों में अच्छी गुणवत्ता की मछलियों का बीज डाला जाए, ताकि भविष्य में उत्पादन बेहतर हो सके।
इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार पश्चिम बंगाल से कतला और सिल्वर कार्प की छोटी मछलियां मंगवाई गई हैं। ये मछलियां उंगली के आकार तक बढ़ चुकी हैं। इन्हें झील में छोड़ने से इनके विकसित होने और भविष्य में मत्स्य संसाधनों को मजबूत करने की उम्मीद है।
ओम कांत ठाकुर ने उम्मीद जताई कि विभाग की इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। गोबिंदसागर झील में मछलियों की उपलब्धता बढ़ने से भविष्य में मछुआरों को अधिक लाभ मिल सकता है। विभाग का लक्ष्य मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आय बढ़ाने के साथ जलाशयों की उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग करना है।
मछली बीज छोड़ने के दौरान विभाग के संयुक्त निदेशक पवन कुमार, सहायक निदेशक पंकज ठाकुर, नीतू सिंह, राकेश कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर स्थानीय मछुआरों और मत्स्य पालक समितियों के सदस्यों ने भी भाग लिया।
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