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मंडी: दीपावली पर मल्टीपर्पज वर्करों ने सरकार से मांगा वेतन और पॉलिसी का तोहफा, 110 बार उठा चुके हैं मांग
Ankesh Dogra
Updated Thu, 22 Oct 2026 12:44 PM IST
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हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत मल्टीपर्पज वर्करों ने दीपावली के मौके पर प्रदेश सरकार से समय पर वेतन और शॉर्ट टर्म पॉलिसी बनाने का तोहफा मांगा है। मल्टीपर्पज वर्कर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष विवेक ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगें सरकार के समक्ष उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। उनका दावा है कि विभिन्न माध्यमों से सरकार को अब तक 110 बार मांगों से अवगत करवाया जा चुका है।
मंडी से जारी बयान में विवेक ने बताया कि मल्टीपर्पज वर्करों को कोरोना काल के दौरान सेवाओं में लगाया गया था। वर्तमान में ये कर्मचारी प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके अनुसार, कर्मचारियों को प्रतिमाह छह हजार रुपये मानदेय मिलता है, जिसमें से करीब चार हजार रुपये आने-जाने पर खर्च हो जाते हैं। ऐसे में सीमित आय में परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो रहा है।
विवेक के अनुसार, मल्टीपर्पज वर्करों ने अपनी मांगों को लेकर गत दिनों उपमुख्यमंत्री से भी मुलाकात की थी। उस दौरान कर्मचारियों को बताया गया था कि सरकार उनके लिए नीति बनाने की प्रक्रिया में है और इस संबंध में फाइल आगे भेज दी गई है। कर्मचारियों का कहना है कि अलग-अलग स्लैब बनाने की बात भी कही गई थी, लेकिन अभी तक उन्हें धरातल पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आया है।
संघर्ष मोर्चा की प्रमुख मांग है कि मल्टीपर्पज वर्करों के लिए शॉर्ट टर्म पॉलिसी बनाई जाए। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे और उम्रदराज हो रहे कर्मियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीति जरूरी है, ताकि वे भी पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के लाभ के दायरे में आ सकें।
कर्मचारियों ने समय पर वेतन नहीं मिलने की समस्या भी उठाई है। उनका कहना है कि कम मानदेय के साथ भुगतान में देरी होने से रोजमर्रा के खर्च पूरे करना कठिन हो जाता है। दूरदराज के क्षेत्रों में ड्यूटी देने के कारण आने-जाने का खर्च भी उनकी आय का बड़ा हिस्सा ले लेता है।
मल्टीपर्पज वर्करों को उम्मीद है कि प्रदेश सरकार दीपावली पर उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला लेगी। विवेक ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगें उठा रहे हैं और अब उन्हें समय पर वेतन तथा शॉर्ट टर्म पॉलिसी के रूप में राहत मिलने की उम्मीद है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को उनकी आर्थिक स्थिति और भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द कदम उठाना चाहिए।
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