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Bankipur by-election: How will Prashant Kishor defeat the BJP in Nitin Nabin's stronghold of Bankipur? Jan Sur
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Bankipur by-election: Nitin Nabin के गढ़ बांकीपुर में BJP को कैसे हराएंगे Prashant Kishor? Jan Suraaj
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Sun, 05 Jul 2026 10:09 PM IST
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बिहार की राजनीति में खुद को लंबे समय तक 'किंगमेकर' के रूप में स्थापित करने वाले प्रशांत किशोर अब पहली बार खुद चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में उम्मीदवार बनने का ऐलान कर दिया है। यह वही सीट है, जिसे भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है और जहां पिछले 31 वर्षों से लगातार भाजपा का कब्जा रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर का यह फैसला बिहार की राजनीति में सबसे बड़ी सियासी चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।
कुछ महीने पहले तक प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी लगातार यह कह रही थी कि वह बांकीपुर उपचुनाव नहीं लड़ेंगे। लेकिन पिछले करीब दो सप्ताह से पार्टी की गतिविधियों ने संकेत देना शुरू कर दिया था कि रणनीति बदल रही है। चार दिन पहले जन सुराज के प्रदेश नेतृत्व ने भी इस ओर इशारा किया था और अब स्वयं प्रशांत किशोर ने चुनाव लड़ने की घोषणा कर सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव किसी जोखिम से ज्यादा अपनी राजनीतिक साख दोबारा स्थापित करने का अवसर है। बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज ने 243 में से 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी को केवल दो सीटों पर जमानत बचाने में सफलता मिली और एक भी सीट नहीं जीत सकी। खुद प्रशांत किशोर ने भी चुनाव नहीं लड़ा था। ऐसे में आलोचकों ने उनकी रणनीति और राजनीतिक दावों पर सवाल उठाए थे। अब बांकीपुर उपचुनाव उनके लिए उस छवि को बदलने का मौका बनकर सामने आया है।
बांकीपुर सीट का राजनीतिक महत्व भी काफी बड़ा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई है। ऐसे में भाजपा के सामने अपनी पारंपरिक सीट बचाने की चुनौती होगी, जबकि प्रशांत किशोर इसे अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता साबित करने का अवसर मान रहे हैं।
प्रशांत किशोर की रणनीति के चार प्रमुख आधार
शहरी वोट बैंक पर भरोसा: जन सुराज का मानना है कि विधानसभा चुनाव में उसे सबसे अधिक समर्थन शहरी और युवा मतदाताओं से मिला था। बांकीपुर पूरी तरह शहरी विधानसभा क्षेत्र है, जहां लगभग 3.79 लाख मतदाता हैं और सभी मतदान केंद्र शहरी इलाके में आते हैं। पार्टी को उम्मीद है कि यही वर्ग इस बार उसके पक्ष में मजबूती से खड़ा होगा।
राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव: विधानसभा चुनाव के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पद छोड़ा और भाजपा ने पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाया। वहीं बांकीपुर के विधायक नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से उपचुनाव की स्थिति बनी। जन सुराज इसे बदले हुए राजनीतिक माहौल में नया अवसर मान रही है।
पूरी ताकत एक सीट पर केंद्रित: विधानसभा चुनाव में पार्टी की संगठनात्मक और आर्थिक ताकत 238 सीटों पर बंटी हुई थी। अब पूरा संगठन, संसाधन और कार्यकर्ता केवल बांकीपुर सीट पर फोकस करेंगे। पार्टी का मानना है कि इससे चुनावी अभियान ज्यादा प्रभावी होगा।
जनता की नाराजगी को मुद्दा बनाना: जन सुराज का दावा है कि महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतें, परिवहन खर्च, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से जुड़ी शिकायतें और सत्ता परिवर्तन के बाद पैदा हुई राजनीतिक नाराजगी जैसे मुद्दे भाजपा के खिलाफ माहौल बना सकते हैं। पार्टी इन्हीं जनभावनाओं को चुनावी अभियान का केंद्र बनाने की तैयारी में है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बांकीपुर में मुकाबला आसान नहीं होगा। यह सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है और शहरी क्षेत्रों में पार्टी का संगठन भी काफी मजबूत माना जाता है। हालांकि, उपचुनाव का अलग राजनीतिक गणित होता है और यदि प्रशांत किशोर शहरी युवाओं, मध्यम वर्ग और नाराज मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने में सफल रहते हैं तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर अपनी पहली प्रत्यक्ष चुनावी परीक्षा में कितना सफल होते हैं। बांकीपुर का उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की भविष्य की राजनीति और जन सुराज की राजनीतिक प्रासंगिकता की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
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