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Black Tomatoes in Betul: Black tomatoes have become gold for farmers, will the fate of farmers change now?
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Black Tomatoes in Betul: काला टमाटर बना किसानों के लिए सोना, अब बदलेगी किसानों की किस्मत?
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Mon, 02 Feb 2026 06:30 AM IST
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक नई और अनोखी कृषि पहल चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है काले टमाटर की खास किस्म की खेती। परंपरागत लाल टमाटर की बजाय यह गहरे काले-बैंगनी रंग का टमाटर स्थानीय किसानों और कृषि विशेषज्ञों दोनों के बीच ध्यान खींच रहा है। इस विशेष किस्म को अमेरिका तथा यूरोप जैसे देशों में पहले से ही प्रीमियम सब्ज़ी के रूप में महत्त्व मिलता है और अब बैतूल के एक प्रगतिशील किसान ने इसे अपने खेतों में सफलतापूर्वक उगाया है।
खबरों के अनुसार, किसान अनिल वर्मा ने अमेरिका से इस काले टमाटर की विशेष किस्म के बीज मंगाकर प्रायोगिक रूप से रोपण किया, जिससे मिली शुरुआती सफलता ने इस प्रयास को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। यह टमाटर रंग में भिन्न होने के साथ-साथ पोषण की दृष्टि से भी अच्छा माना जाता है और विशेषज्ञों के अनुसार यह हृदय स्वास्थ्य, मोटापा और अन्य गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक पोषक तत्वों से भरपूर है।
इस अनूठी किस्म की खेती अभी सीमित पैमाने पर की जा रही है, लेकिन पहले परिणाम उत्साहजनक हैं। कई पौधों पर 350 से 400 ग्राम तक वजन वाले टमाटर लगे हैं, जो सामान्य टमाटरों की तुलना में काफी बड़े और आकर्षक हैं। बाजार स्तर पर भी इस काले टमाटर को सुपरफूड के रूप में देखा जा रहा है, और इसकी संभावित कीमत 800 से 1000 रुपये प्रति किलो तक बताई जा रही है, जो इसे किसानों के लिए एक आकर्षक नकदी फसल विकल्प बनाती है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बैतूल जैसी जलवायु और मिट्टी इस किस्म के विकास के लिए उपयुक्त है, और अगर इसकी खेती को वैज्ञानिक तकनीक तथा उचित प्रबंधन के साथ आगे बढ़ाया जाए तो यह क्षेत्रीय कृषि में एक नई पहचान स्थापित कर सकता है। इससे न सिर्फ किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय और राष्ट्रीय बाजारों में उच्च मूल्य वाली फसल के रूप में भी इसकी मांग बढ़ सकती है।
उपभोक्ताओं और शैक्षणिक कृषि समुदाय दोनों के लिए यह पहल रोचक रही है, क्योंकि यह पारंपरिक खेती के मॉडल से हटकर नवीनतम कृषि नवाचारी सोच को दर्शाती है। यदि आगे शोध और प्रचार-प्रसार जारी रहा, तो यह ‘काला टमाटर’ भारत में एक प्रीमियम तथा स्वास्थ्यवर्धक सब्ज़ी के रूप में लोकप्रियता हासिल कर सकता है, और बैतूल जिले को इसके उत्पादन के लिए एक केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है।
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