AI की दुनिया में भारत को अपना “पोखरण” करना ही होगा। जैसे 1998 में पोखरण परीक्षण ने दुनिया को यह संदेश दिया था कि भारत सिर्फ एक उभरती ताकत नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और निर्णायक राष्ट्र है, ठीक वैसे ही आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में हमें टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी क्षमता का साहसिक प्रदर्शन करना होगा। यह समय सिर्फ उपभोक्ता बनने का नहीं, बल्कि निर्माता बनने का है। दुनिया तेजी से AI आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है। डेटा ही नया ईंधन है और एल्गोरिद्म नई शक्ति। ऐसे में अगर भारत अपने विशाल युवा जनसंख्या, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत आईटी इकोसिस्टम का सही इस्तेमाल करे, तो वह वैश्विक AI शक्ति बन सकता है। लेकिन इसके लिए साहसिक नीतिगत फैसले, रिसर्च में भारी निवेश, स्वदेशी चिप निर्माण, और डेटा संप्रभुता की स्पष्ट रणनीति जरूरी है।
भारत के पास UPI जैसा डिजिटल मॉडल है, जिसने पूरी दुनिया को चौंकाया। अब जरूरत है कि उसी आत्मविश्वास के साथ AI मॉडल, भाषा मॉडल, रक्षा और हेल्थ सेक्टर में स्वदेशी समाधान तैयार किए जाएं। “AI का पोखरण” किसी विस्फोट का प्रतीक नहीं, बल्कि नवाचार, आत्मनिर्भरता और तकनीकी नेतृत्व का प्रतीक होगा। अगर भारत ने समय रहते यह कदम नहीं उठाया, तो वह सिर्फ विदेशी तकनीकों का बाजार बनकर रह जाएगा। लेकिन यदि हमने साहस दिखाया, तो आने वाला दशक भारत का होगा जहां AI सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण का सबसे बड़ा हथियार बनेगा।