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Ram Mandir Donation Theft: Lawyers to boycott the case of the accused; what did the Congress say?
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Ram Mandir Donation Theft: चढ़ावा चोरी के आरोपियों के केस का बहिष्कार करेंगे वकील, क्या बोली कांग्रेस?
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Tue, 30 Jun 2026 04:30 AM IST
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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले को लेकर लोगों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए घोषणा की कि उसका कोई भी सदस्य इस मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों की ओर से अदालत में पैरवी नहीं करेगा। बार एसोसिएशन के इस फैसले को लेकर कानूनी और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा हो रही है। दूसरी ओर, मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में दायर उस याचिका पर सुनवाई करने की बात कही है, जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की निगरानी में तय समय-सीमा के भीतर जांच कराने की मांग की गई है। हालांकि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस याचिका पर सुनवाई गर्मियों की छुट्टियों के बाद की जाएगी।
इस बीच कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे में कथित गड़बड़ी को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि जिस तरह के आरोप सामने आए हैं, उससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और यही कारण है कि समाज में इस मुद्दे को लेकर गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। राजीव शुक्ला ने यह भी कहा कि यह मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है और इसकी निष्पक्ष तथा सार्थक जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार यदि जांच में किसी बड़े व्यक्ति या प्रभावशाली शख्स की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के पूरे मामले की तह तक जाना चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके। फिलहाल इस मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार किया जा रहा है, जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों तथा न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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