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West Bengal UCC Bill: Sukanta Majumdar's reply to the opposition ahead of the UCC bill's introduction in Benga
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West Bengal UCC Bill:बंगाल में UCC बिल पेश होने से पहले सुकांता मजूमदार ने दिया विपक्ष को ये जवाब!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Mon, 29 Jun 2026 03:45 AM IST
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सुकांता मजूमदार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में स्पष्ट रूप से वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे और केंद्र सरकार उसी वादे के अनुरूप काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति केवल घोषणाएं करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी अपने चुनावी वादों को धरातल पर उतारने का प्रयास कर रही है। मजूमदार ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में कथित "लव जिहाद" और "लैंड जिहाद" जैसे मुद्दों को उठाया है तथा इन विषयों पर गंभीरता से चर्चा की है। उन्होंने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी भी देश में बदलती जनसांख्यिकी को लेकर चिंता जता चुके हैं और सरकार इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत स्तर पर काम कर रही है। मजूमदार के अनुसार, पश्चिम बंगाल में इन मुद्दों पर प्रभावी कदम उठाना राज्य के हित में होगा और इससे कानून व्यवस्था तथा सामाजिक संतुलन को मजबूती मिलेगी।
सुकांता मजूमदार ने आगे कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देने की बात करता है और उसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति, वर्ण या अन्य आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं, जिससे समानता के सिद्धांत पर प्रश्न उठते हैं। उनके अनुसार, एक ही देश में रहने वाले दो नागरिकों के लिए अलग-अलग कानून नहीं होने चाहिए और समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि यूसीसी लागू होने से समान अधिकारों और न्याय के संवैधानिक सिद्धांत को और मजबूती मिलेगी।
हालांकि, समान नागरिक संहिता का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय रहा है। इसके समर्थक इसे संविधान में निहित समानता के सिद्धांत को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानते हैं, जबकि इसके विरोधी विभिन्न धार्मिक समुदायों के पर्सनल लॉ और सांस्कृतिक अधिकारों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। ऐसे में यूसीसी को लेकर देश में राजनीतिक चर्चा और वैचारिक मतभेद लगातार जारी हैं।
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