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Suvendu Adhikari PA Shot Dead: शुभेंदु अधिकारी के PA की गोली मारकर हत्या
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Thu, 07 May 2026 12:40 AM IST
पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा और अब इस हिंसा ने एक और जान ले ली है। उत्तर 24 परगना के मध्यग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के पीएसओ चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस वारदात ने न सिर्फ इलाके में दहशत फैला दी है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि बुधवार रात चंद्रनाथ रथ अपनी कार से जा रहे थे, तभी हमलावरों ने उनका पीछा किया। दोहारिया इलाके में पहुंचते ही बाइक सवार बदमाशों ने उनकी गाड़ी को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, करीब चार राउंड गोलियां चलाई गईं, जिनमें से तीन गोलियां सीधे उनके सिर में लगीं। गंभीर रूप से घायल चंद्रनाथ को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
इस सनसनीखेज हत्या के बाद पूरे मध्यग्राम इलाके में डर और तनाव का माहौल है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और पूरे इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और हमलावरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। भाजपा ने इस हत्या के लिए सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का आरोप है कि चुनावी नतीजों के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बयान बताया है।
चुनाव के बाद राज्य में हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। अब तक हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और मारपीट के करीब 200 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस ने 433 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 1100 से ज्यादा लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया है। इसके बावजूद हालात पूरी तरह काबू में नहीं दिख रहे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल लोगों की तुरंत गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस आयुक्त, केंद्रीय बलों के डीजी, सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को लगातार गश्त और निगरानी बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा पर लगाम लग पाएगी? क्या दोषियों को सजा मिलेगी? और आखिर कब थमेगा खून-खराबे का यह सिलसिला?
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