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West Bengal Election Results 2026: RG Kar victim's mother becomes MLA, remembers her daughter!
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West Bengal Election Results 2026:आर.जी. कर पीड़िता की मां बनीं विधायक, अपनी बेटी को किया याद!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Tue, 05 May 2026 03:30 AM IST
आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज दुष्कर्म और हत्या मामले की पीड़िता की मां और पानीहाटी सीट से भाजपा की विजयी उम्मीदवार रत्ना देबनाथ ने कहा, "यह जीत पानीहाटी, पूरे बंगाल की जनता की जीत है। यह जीत मैं प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित करती हूँ। घोष परिवार के अप्रशासन से मैं जनता को मुक्ति दिला पाई हूँ इसके लिए जनता का धन्यवाद, यह मैं अकेले नहीं कर पाती, पानीहाटी की जनता के कारण यह जीत मिली है।"
आर.जी. कर मामले की पीड़िता की मां का विधायक बनना न केवल एक व्यक्तिगत संघर्ष की जीत है, बल्कि यह न्याय और सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है। अपनी बेटी के साथ हुए अन्याय के बाद जिस तरह से उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार न्याय के लिए आवाज उठाई, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रियाओं में अपनी बेटी को याद करते हुए कहा कि यह जीत सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उनकी बेटी के अधूरे सपनों की जीत है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनकी बेटी आज भले ही इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी याद और उसके साथ हुए अन्याय ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है।
विधायक बनने के बाद उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था में सुधार और पीड़ित परिवारों को मजबूत समर्थन देना होगा। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि किसी भी मां को वह दर्द न सहना पड़े जो उन्होंने सहा है। उनके इस संघर्ष ने आम लोगों के बीच गहरी सहानुभूति और समर्थन पैदा किया, जिसका असर चुनाव में भी देखने को मिला। लोग उन्हें सिर्फ एक उम्मीदवार के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी मां के रूप में देख रहे थे जो न्याय की लड़ाई का प्रतीक बन चुकी है। उनकी जीत यह भी दिखाती है कि जब कोई व्यक्ति सच्चाई और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ता है, तो समाज उसका साथ देता है। विधायक बनने के बाद उन्होंने अपनी बेटी की याद में समाज के लिए काम करने का संकल्प लिया और कहा कि वह हर उस आवाज को बुलंद करेंगी जो दबा दी जाती है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित किया है कि व्यक्तिगत दुख को सामाजिक परिवर्तन की ताकत में बदला जा सकता है, और यही उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई है।
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