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Tej Pratap Yadav News: Tej Pratap Yadav revealed 5 Jaichand for the first time, did he also become the father
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Tej Pratap Yadav News: तेज प्रताप यादव ने पहली बार किया 5 जयचंदों का खुलासा, क्या बेटी के पिता भी बने?
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Mon, 09 Feb 2026 03:30 AM IST
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राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेज प्रताप यादव एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सियासी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। इस बार उन्होंने “पांच जयचंदों” का जिक्र करते हुए पार्टी और परिवार के भीतर कथित गद्दारों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला है। तेज प्रताप ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि राजद और उनके पिता लालू प्रसाद यादव को कमजोर करने में कुछ अपने ही लोगों की भूमिका रही है। उनके अनुसार ये वही लोग हैं, जिन्होंने मुश्किल वक्त में पार्टी और नेतृत्व का साथ देने के बजाय पीठ पीछे साजिशें कीं और राजनीतिक नुकसान पहुंचाया। तेज प्रताप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार की राजनीति में अंदरूनी खींचतान और आगामी चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हैं।
तेज प्रताप यादव ने हालांकि इन “पांच जयचंदों” के नाम सीधे तौर पर नहीं लिए, लेकिन उनके संकेतों ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। उनके समर्थकों का कहना है कि तेज प्रताप लंबे समय से खुद को पार्टी में हाशिए पर महसूस कर रहे थे और अब उन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। बयान में भावनात्मक लहजा भी साफ नजर आया, जिसमें उन्होंने यह संकेत दिया कि जिन लोगों पर भरोसा किया गया, वही भरोसे पर खरे नहीं उतरे। यह बयान सिर्फ व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि राजद के अंदर चल रही गुटबाजी की ओर भी इशारा करता है।
इसी बयान के साथ एक और सवाल चर्चा में आ गया क्या “बेटी के पिता” भी इस दायरे में आते हैं? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार तेज प्रताप का इशारा कहीं न कहीं पारिवारिक और राजनीतिक रिश्तों की जटिलता की ओर है। हालांकि तेज प्रताप ने इस मुद्दे पर कोई सीधा नाम या स्पष्ट आरोप नहीं लगाया, लेकिन उनके शब्दों ने यह बहस जरूर छेड़ दी है कि क्या परिवार के भीतर भी विश्वास की दरारें गहरी हो चुकी हैं। समर्थक जहां इसे तेज प्रताप की बेबाकी बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे पार्टी के लिए नुकसानदेह मान रहे हैं।
कुल मिलाकर, तेज प्रताप यादव का “पांच जयचंदों” वाला बयान राजद की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर सार्वजनिक बहस में ले आया है। इससे न केवल पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि यह भी साफ हो गया है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि राजद नेतृत्व इस स्थिति को कैसे संभालता है और क्या तेज प्रताप अपने आरोपों को आगे चलकर और स्पष्ट करते हैं या नहीं।
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