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UP Sir Controversy: AAP MP Sanjay Singh furious over BLO deaths, questions pressure on Sir!
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UP SIR Controversy: BLO की मौतों पर भड़के AAP सांसद संजय सिंह, SIR के दबाव पर दागे सवाल!
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Mon, 01 Dec 2025 02:45 AM IST
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने 'SIR' (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे देश का "सबसे बड़ा चुनावी घोटाला" करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की इस प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक दबाव के कारण उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में अब तक 26 से अधिक बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की मौत हो चुकी है, जिसे उन्होंने आत्महत्या नहीं बल्कि 'हत्या' बताया है। संजय सिंह का आरोप है कि 'SIR' के नाम पर दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटने की "सुनियोजित साजिश" चल रही है, जिसका एकमात्र मकसद चुनावों में सत्ताधारी पार्टी (BJP) को फायदा पहुंचाना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में 80 लाख नाम हटाए गए हैं और उत्तर प्रदेश में दो करोड़ से अधिक लोगों के मताधिकार छीनने का षड्यंत्र है। AAP सांसद ने मृत बीएलओ के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को संसद के शीतकालीन सत्र में पूरी ताकत से उठाएगी और यदि सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो प्रदेशव्यापी व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्य विपक्षी दल, समाजवादी पार्टी (सपा), इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठा रही है और इसे मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकार को छीनने की "सोची-समझी साजिश" बता रही है। सपा का मुख्य आरोप है कि इस अभियान के माध्यम से गरीबों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों सहित बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम फर्जी तरीके से काटे जा रहे हैं ताकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आगामी चुनावों में फायदा मिल सके। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग और भाजपा पर मिलीभगत का आरोप लगाया है और SIR की प्रक्रिया में हो रही कथित अनियमितताओं को संसद में उठाने और सड़क पर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। इसके अतिरिक्त, सपा ने अधिकारियों की जाति और धर्म के आधार पर तैनाती का आरोप लगाते हुए प्रक्रिया की तटस्थता पर सवाल उठाया है। गाजियाबाद में SIR के काम में लापरवाही बरतने के आरोप में 21 बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने और कथित कार्य दबाव के कारण एक बीएलओ (विजय वर्मा) की मृत्यु होने जैसे मामले भी विवाद को बढ़ा रहे हैं, जिसके लिए सपा ने सरकार और निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, भाजपा और सरकार के मंत्री इन आरोपों को खारिज करते हुए कह रहे हैं कि विपक्ष फर्जी वोट बनवाने का आदी है और मतदाता सूची को शुद्ध करने के इस आवश्यक लोकतांत्रिक प्रयास से डरा हुआ है।
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