Hindi News
›
Video
›
India News
›
Vande Mataram Full Song: Listen to the entire 6 verses of the national anthem, how to sing it correctly? New V
{"_id":"69918e09c8d8e24a0d0e1a90","slug":"vande-mataram-full-song-listen-to-the-entire-6-verses-of-the-national-anthem-how-to-sing-it-correctly-new-v-2026-02-15","type":"video","status":"publish","title_hn":"Vande Matram Full Song: राष्ट्रगीत के पूरे 6 छन्द सुनिए, कैसे शुद्ध रूप से गाएं ? New Version","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Vande Matram Full Song: राष्ट्रगीत के पूरे 6 छन्द सुनिए, कैसे शुद्ध रूप से गाएं ? New Version
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: अभिलाषा पाठक Updated Sun, 15 Feb 2026 03:00 PM IST
राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर केंद्र सरकार ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। ऐसे में अब राष्ट्र गान 'जन गण मन' से पहले राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' बजेगा। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार सरकार ने आधिकारिक मौकों पर 'वंदे मातरम्' के छह अंतरा वाले संस्करण को बजाना या गायन अनिवार्य किया है। जिसकी कुल अवधि 3. 10 मिनट होगी। राष्ट्रगीत के सभी छह छंद बजाए जाएंगे, जिनमें वे चार छंद भी शामिल हैं, जिन्हें कांग्रेस ने 1937 में हटा दिया था। अमर उजाला आपके लिए संपूर्ण राष्ट्रगीत(वंदे मातरम्) लेकर आया है।
वंदे मातरम की रचना मूल रूप से बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1870 के दशक में की गई थी। इसे 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया गया था। इस गीत को सबसे पहले रवींद्रनाथ टैगोर ने संगीतबद्ध (compose) किया था, और आगे चलकर इसे राग देश में भी गाया गया। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बंगाली और संस्कृत में लिखा गया था और भारत माता को श्रद्धांजलि के रूप में गाया जाता था।
इस गीत की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1874 को अक्षय नवमी के शुभ अवसर पर की थी। यह अमर गीत न केवल भारतीय स्वाधीनता संग्राम का मुख्य उद्घोष बना बल्कि आज देश का राष्ट्रगीत भी है।इस रचना के पीछे एक रोचक कहानी है। जानकारी के अनुसार, अंग्रेजी हुक्मरानों ने इंग्लैंड की महारानी के सम्मान वाले गीत- गॉड! सेव द क्वीन को हर कार्यक्रम में गाना अनिवार्य कर दिया था। इससे बंकिम चंद्र समेत कई देशवासी आहत हुए थे। इससे जवाब में उन्होंने 1874 में वंदे मातरम शीर्षक से एक गीत की रचना की। इस गीत के मुख्य भाव में भारत भूमि को माता कहकर संबोधित किया गया था। यह गीत बाद में उनके 1882 में आए उपन्यास आनंदमठ में भी शामिल किया गया था। ऐतिहासिक और सामाजिक तानेबाने से बुने हुए इस उपन्यास ने देश में राष्ट्रीयता की भावना जागृत करने में बहुत योगदान दिया।
1896 में कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का एक अधिवेशन हुआ था। उस अधिवेशन में पहली बार वंदे मातरम गीत गाया गया था। थोड़े ही समय में राष्ट्र प्रेम का द्योतक यह गीत अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारतीय क्रांतिकारियों का पसंदीदा गीत और मुख्य उद्घोष बन गया। देशभर में क्रांतिकारी बच्चे, युवा, व्यस्क और प्रौढ़ ही नहीं यहां तक कि भारतीय महिलाओं की जुबां पर भी आजादी की लड़ाई का एक ही नारा गूंज उठता था और वह है वंदे मातरम।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।