पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल ही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद Trinamool Congress यानी टीएमसी अब विपक्ष की भूमिका में आ गई है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता Sobhandeb Chattopadhyay को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया है, जबकि Nayna Bandyopadhyay को डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी दी गई है। नैना बंद्योपाध्याय ने साफ संकेत दिए हैं कि टीएमसी अब सरकार को हर मुद्दे पर घेरने की रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी का मुख्य फोकस राज्य के लोगों से जुड़े मुद्दों, केंद्र-राज्य संबंधों, आर्थिक मामलों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के इस्तेमाल पर रहेगा।
नैना बंद्योपाध्याय और टीएमसी नेताओं का कहना है कि नई सरकार के सामने जनता से किए गए वादों को पूरा करने की बड़ी चुनौती होगी और विपक्ष के तौर पर टीएमसी हर फैसले की निगरानी करेगी। पार्टी बेरोजगारी, महंगाई, महिलाओं की सुरक्षा, किसानों की समस्याओं और सामाजिक योजनाओं में संभावित कटौती जैसे मुद्दों को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाने की तैयारी कर रही है। टीएमसी का आरोप है कि केंद्र सरकार पहले भी केंद्रीय एजेंसियों और आर्थिक दबाव का इस्तेमाल करके विपक्षी राज्यों को कमजोर करने की कोशिश करती रही है। पार्टी इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाकर सरकार पर दबाव बनाना चाहती है।
टीएमसी की रणनीति केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहने वाली है। पार्टी विपक्षी दलों के साथ मिलकर बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की योजना बना रही है। इसमें संविधान की संघीय व्यवस्था, राज्यों के अधिकार, केंद्रीय योजनाओं के फंड, गैस सिलेंडर की कीमतें और विभिन्न आर्थिक फैसलों का विरोध शामिल है। पार्टी पहले भी संसद और सड़कों पर इन मुद्दों को उठाती रही है और अब विपक्ष में आने के बाद इसे और आक्रामक तरीके से चलाने की तैयारी कर रही है।
नैना बंद्योपाध्याय ने यह भी संकेत दिया है कि टीएमसी जनता के बीच जाकर यह बताने की कोशिश करेगी कि नई सरकार किन मुद्दों पर असफल हो रही है। पार्टी का मानना है कि मजबूत विपक्ष लोकतंत्र के लिए जरूरी है और वह हर जनहित के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में पश्चिम बंगाल विधानसभा में सत्ता पक्ष और टीएमसी के बीच तीखी राजनीतिक लड़ाई देखने को मिल सकती है।