अमेरिका में एक भारतीय के मूल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गोली मार दी गई । इंजीनियर बहुप्रसिद्ध कंपनी गूगल में काम करता था। मरने से पहले वो गूगल पर गंभीर आरोप लगाए। लिंकडिन पर एक पोस्ट करता है, फिर उसके बाद खबर आती है कि पुलिस ने उसको गोली मार दी। दरअसल, इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर का नाम मोहम्मद निजामुद्दीन था।
ऐसे में ये जानना अहम है कि मोहम्मद निजामुद्दीन ने गूगल पर क्या आरोप लगाए, क्यों आरोप लगाए, पुलिस ने गोली क्यों मारी, पुलिस कार्रवाई सवालों के घेरे में क्यों आ रही है, निजामुद्दीन के परिवार को करीब 2 हफ्ते बाद क्यों बताया गया?
दरअसल, मोहम्मद निजामुद्दीन तेलंगाना के महबूबनगर जिले का रहने वाला था। 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की 3 सितंबर को कैलिफोर्निया के सांता क्लारा में पुलिस की गोली से मौत हो गई। इस घटना के बाद उनका एक
LinkedIn पोस्ट सामने आया है जिसमें उन्होंने Google में काम के दौरान झेले गए नस्लीय भेदभाव और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस का दावा है कि निजामुद्दीन ने अपने रूममेट पर चाकू से हमला किया था और मौके पर हालात इतने बिगड़े कि फोर्स को गोली चलानी पड़ी। लेकिन निजामुद्दीन और उसके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं- जिसमें नस्लीय भेदभाव, वेतन में धोखाधड़ी और कार्यस्थल पर उत्पीड़न तक की बातें सामने आई हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये महज एक अपराध की घटना थी या फिर इसमें गहराई में कोई और सच्चाई छिपी है।
चलिए पहले जानते हैं कि
मोहम्मद निजामुद्दीन ने अपने
लिंक्डइन पोस्ट में लिखा था…
'मैं नस्लीय घृणा, नस्लीय भेदभाव, नस्लीय उत्पीड़न, यातना, वेतन धोखाधड़ी, गलत बर्खास्तगी और न्याय में बाधा का शिकार रहा हूँ। आज मैंने सभी बाधाओं के खिलाफ आवाज़ उठाने का फैसला किया है। बहुत हो गया। श्वेत वर्चस्व/नस्लवादी श्वेत अमेरिकी मानसिकता का अंत होना चाहिए। कॉर्पोरेट तानाशाहों का उत्पीड़न समाप्त होना चाहिए और इसमें शामिल सभी लोगों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। मैंने बहुत शत्रुता, खराब/अस्वीकार्य माहौल, नस्लीय भेदभाव और नस्लीय उत्पीड़न का सामना किया है। इसके अलावा कंपनी ने वेतन धोखाधड़ी की है। मुझे निष्पक्ष भुगतान नहीं मिला, DOL वेतन-स्तर के अनुसार नहीं। उन्होंने मुझे पूरी तरह से गलत तरीके से नौकरी से निकाल दिया।
यह यहीं समाप्त नहीं हुआ। उन्होंने एक नस्लवादी जासूस और टीम की मदद से अपना उत्पीड़न, भेदभाव और डराने-धमकाने का व्यवहार जारी रखा। हाल ही में स्थिति खराब हो गई है और बदतर हो गई है। मेरे खाने में जहर मिलाया गया और अब मुझे अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए अपने वर्तमान निवास से बेदखल किया जा रहा है। मुख्य आक्रमणकारी - सहकर्मी, नियोक्ता, क्लाइंट, जासूस और उनका पूरा समुदाय मुख्य आक्रमणकारी हैं। वे परेशानी पैदा करने वाले और वर्तमान अराजकता के पीछे दमनकारी हैं, मैं नहीं। यह आज मेरे साथ हो रहा है, और कल किसी और के साथ हो सकता है। इसलिए मैं दुनिया से कहता हूं कि शामिल लोगों के उत्पीड़न और गलत कामों के खिलाफ न्याय की मांग में जरूरी कार्रवाई करें। मैं पूरी तरह समझता हूँ कि मैं कोई संत नहीं हूँ, लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि वे भी कोई भगवान नहीं हैं। मैं बाकी फाइलें एक अन्य पोस्ट में अपलोड करूंगा।'
पुलिस की गोली से मौत
सांता क्लारा पुलिस के मुताबिक, 3 सितंबर की सुबह 6:08 बजे उन्हें एक निवास में छुरेबाजी की घटना की रिपोर्ट मिली। एक 911 कॉल आई थी जिसमें कहा गया कि एक व्यक्ति ने अपने रूममेट को चाकू से घायल कर दिया है। पुलिस वहाँ पहुंची, स्थिति बिगड़ी, और एक व्यक्ति (निजामुद्दीन) ने कथित रूप से चाकू पकड़ा था और घायल रूममेट को दबाए हुए था। पुलिस ने 'officer-involved shooting' किया, निजामुद्दीन को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
निजामुद्दीन के पिता मोहम्मद हसनुद्दीन को अपने बेटे की मौत की खबर घटना के दो हफ्ते बाद मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर अपने बेटे के शव को भारत लाने में सहायता की अपील की है। पत्र में उन्होंने लिखा, 'आज सुबह मुझे पता चला कि मेरे बेटे को सांता क्लारा पुलिस ने गोली मारकर मार दिया और उसके नश्वर अवशेष सांता क्लारा के किसी अस्पताल में हैं। मुझे नहीं पता कि पुलिस ने उसे क्यों मारा।' परिवार का दावा है कि निजामुद्दीन ने खुद पुलिस को मदद के लिए फोन किया था, लेकिन उसे ही गोली मार दी गई। एक रिश्तेदार ने बताया कि जब पुलिस कमरे में घुसी, तो उन्होंने दोनों लोगों से हाथ ऊपर करने को कहा। एक ने मान लिया, दूसरे ने नहीं माना। इसके बाद पुलिस ने चार राउंड फायर किए। परिवार का कहना है कि 'यह अत्यंत खेदजनक है कि रिपोर्टों के अनुसार, कोई उचित जांच नहीं हुई और गोलीबारी इतनी जल्दी हो गई।'