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IRGC Head of Intelligence Majid Khademi Killed: Death of IRGC Intelligence Chief Majid Khademi.
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IRGC Head of Intelligence Majid Khademi Killed: IRGC के खुफिया प्रमुख माजिद खादेमी की मौत
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Mon, 06 Apr 2026 08:57 PM IST
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान को एक बड़ा झटका लगा है। ईरान की सरकारी मीडिया ने सोमवार को पुष्टि की कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के खुफिया संगठन के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल माजिद खादेमी की एक हमले में मौत हो गई है। यह हमला सोमवार तड़के हुआ, जिसे आईआरजीसी ने “आपराधिक आतंकवादी कार्रवाई” करार दिया है।
आईआरजीसी ने इस हत्या के लिए “अमेरिकी-यहूदी शासन के दुश्मन” को जिम्मेदार ठहराया है, जो आमतौर पर ईरान की ओर से अमेरिका और इजराइल के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला संकेत है। हालांकि, इस हमले की सटीक लोकेशन को लेकर अभी तक आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सोमवार सुबह तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में भारी हवाई हमले हुए, जिनमें इस्राइल और अमेरिका से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
माजिद खादेमी ईरान की सुरक्षा व्यवस्था के बेहद अहम और प्रभावशाली अधिकारी माने जाते थे। जून 2022 में उन्हें आईआरजीसी के खुफिया संरक्षण संगठन का प्रमुख बनाया गया था। इसके बाद 19 जून 2025 को उन्हें आईआरजीसी के खुफिया संगठन का प्रमुख नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने मोहम्मद काजेमी की जगह ली थी, जिनकी पहले के संघर्षों में मौत हो गई थी।
खादेमी की खासियत सिर्फ उनकी सैन्य भूमिका तक सीमित नहीं थी। वे एक उच्च शिक्षित अधिकारी भी थे और उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक रक्षा विज्ञान में पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। यही वजह थी कि उन्हें ईरान के सुरक्षा तंत्र का एक रणनीतिक दिमाग माना जाता था।
अपने करियर के दौरान माजिद खादेमी ने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। 2018 से 2022 तक उन्होंने ईरान के रक्षा मंत्रालय में सूचना संरक्षण संगठन का नेतृत्व किया। इसके बाद 2022 से 2025 तक वे आईआरजीसी के खुफिया संरक्षण संगठन के प्रमुख रहे, जहां उनकी जिम्मेदारी प्रति-जासूसी और आंतरिक निगरानी की थी। 2025 में उन्हें आईआरजीसी खुफिया प्रमुख बनाया गया, जो ईरान की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा रणनीति में बेहद अहम भूमिका निभाता है।
खादेमी की मौत ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और कई देश युद्धविराम की कोशिशों में लगे हुए हैं। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश 45 दिनों के संभावित युद्धविराम ढांचे के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं। इस प्रस्ताव पर वाशिंगटन और तेहरान दोनों विचार कर रहे हैं, हालांकि ईरान ने सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि माजिद खादेमी की हत्या से ईरान की खुफिया और सुरक्षा प्रणाली को बड़ा झटका लग सकता है। इससे न केवल आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।
यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब पहले से ही मध्य-पूर्व में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी की हत्या ने हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है या फिर कूटनीतिक प्रयासों को गति मिलती है।
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