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Arab League: 'यूक्रेन में रूस को कोई नहीं हरा सकता', अरब लीग प्रमुख का बड़ा बयान; ईरान-अमेरिका पर क्या बोले?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: लव गौर Updated Sat, 31 Jan 2026 09:38 AM IST
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सार

Arab League: अरब लीग प्रमुख अबुल घेइत ने रूस पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में साफ कहा कि यूक्रेन में रूस को कोई भी नहीं हरा सकता। इसी के साथ उन्होंने ईरान में चल रहे संघर्ष और अमेरिका पर भी बयान दिया है। 

Arab League Secretary General Ahmed Aboul Gheit Said Russia cannot be defeated in Ukraine
अरब लीग महासचिव अहमद अबुल घेइत और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन - फोटो : ANI Photos
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विस्तार
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यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग को खत्म करने के प्रयास जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों के देशों के बीच सुलह कराने की कोशिश कर रहे हैं। यहां तक ट्रंप ने अपने हालिया दावे में साफ कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में बातचीत अब काफी नजदीक पहुंच चुकी है। अब इस कड़ी में अब अरब लीग महासचिव अहमद अबुल घेइत ने वैश्विक शक्ति संतुलन पर कहा कि प्रमुख शक्तियों ने शीत युद्ध के दौरान भी परमाणु संघर्ष से परहेज किया था। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन में रूस को हराया नहीं जा सकता।
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'यूक्रेन में कोई भी रूस को हरा नहीं सकता'
नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय स्थिरता पर अपना व्यापक दृष्टिकोण रखते हुए अबुल घेइत ने शुक्रवार को इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि शीत युद्ध के बीच रूस, अमेरिका और चीन शांति बनाए हुए थे, अन्यथा परमाणु हथियार सक्रिय हो जाते। इस ऐतिहासिक संतुलन को मौजूदा वास्तविकताओं से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि मॉस्को अपनी स्थिति को मजबूत करना जारी रखे हुए है। इसी के साथ उन्होंने दावा किया कि रूस अपनी क्षमता का निर्माण कर रहा है और यूक्रेन में कोई भी रूस को हरा नहीं सकता।
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अपने इस बिंदु को रेखांकित करने के लिए पूर्व के संघर्षों से तुलना करते हुए अरब लीग प्रमुख ने कहा कि आप अफगानिस्तान में रूस को हरा सकते हैं, क्योंकि यह मॉस्को से 11,000 मील दूर है। वर्तमान भू-राजनीतिक बदलावों पर चर्चा करते हुए अबुल घेइत ने बदलती रणनीतियों के बारे में बात करते हुए कहा कि अमेरिका रूस को चीन से दूर करने की कोशिश कर रहा है।"

यूरोप में पहले के घटनाक्रमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, 'पुतिन के उदय और कुछ फ्रांसीसी राजनेताओं के प्रस्ताव के साथ रूस 1993-94 में नाटो में शामिल होना चाहता था।" बता दें कि उस दौर में रूस ने पश्चिमी सुरक्षा ढांचों के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित करने की संभावना तलाशी, और तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के प्रति सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाया, जिसमें एक नए यूरोपीय सुरक्षा ढांचे के हिस्से के रूप में संभावित सदस्यता में रुचि दिखाना भी शामिल था।

इस दौरान येल्तसिन ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से बातचीत की और चिंता व्यक्त की कि नाटो का पूर्व की ओर विस्तार शीत युद्ध के बाद के समझौतों की भावना के विपरीत है, हालांकि मॉस्को ने शुरू में इस प्रक्रिया को सीधे तौर पर रोकने से परहेज किया और इसके बजाय जुड़ाव तंत्र को विस्तार के संभावित विकल्प के रूप में देखा।

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ईरान के खिलाफ कार्रवाई पर दी चेतावनी
अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल ने चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ कोई भी सैन्य कार्रवाई पश्चिम एशिया और उससे परे व्यापक अस्थिरता को जन्म दे सकती है। उन्होंने गाजा में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले शांति बोर्ड को अरब देशों के समर्थन का बचाव करते हुए इसे एक व्यावहारिक प्रयास बताया।

इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स के कार्यक्रम में अबुल घेइत ने अरब लीग की व्यापक क्षेत्रीय स्थिति को बताते हुए कहा कि खाड़ी देशों ने लगातार सैन्य टकराव को अस्वीकार किया है और राजनयिक समाधानों का समर्थन किया है। संभावित टकराव के जोखिमों पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर ऐसी कोई घटना होती है, तो यह पश्चिम एशिया और सभी के लिए नकारात्मक होगी। उन्होंने आगे कहा कि यह विश्व की शांति के लिए एक आपदा होगी। वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खाड़ी में जंगी बेड़ा भेजने के एलान पर जवाब दे रहे थे। इस बयान के बाद तेहरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं बढ़ गई हैं।

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गाजा शांति बोर्ड पर क्या बोले?
वहीं, अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल घेइत ने गाजा पर अमेरिकी नेतृत्व वाले शांति बोर्ड का समर्थन करने के अरब देशों के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि बार-बार किए गए राजनयिक प्रयासों के विफल होने के बाद इससे युद्धविराम की एक दुर्लभ संभावना बनी है। गाजा पहल के लिए अरब देशों के समर्थन का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, 'वॉशिंगटन में हमारे एक राष्ट्रपति थे, जिन्होंने स्वीकार किया था कि वे स्वयं एक यहूदी थे। उन्होंने एक यहूदी के तौर पर सीधे इस्राइल का समर्थन किया।' पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'सुरक्षा परिषद में चार बार फलस्तीन में युद्धविराम की मांग की गई और मसौदा प्रस्ताव पेश किए गए, लेकिन उस समय के अमेरिकी प्रशासन ने उन सभी को वीटो कर दिया।'

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