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US-Iran Tensions: पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरान का बड़ा एलान, अमेरिकी युद्धपोत के पास करेगा नौसैनिक अभ्यास
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई / वॉशिंगटन
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 31 Jan 2026 02:16 PM IST
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सार
US-Iran Tensions: अमेरिका की तरफ से विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन और अन्य अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को पश्चिम एशिया में तैनात करने के बाद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो दिवसीय नौसैनिक अभ्यास की घोषणा की है, जो रविवार से शुरू होने वाला है।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिका ने ईरान की तरफ से अपना सबसे बड़ा बेड़ा भेजा है, जिससे पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। वहीं ईरान ने भी मोर्चा संभालते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में दो दिवसीय नौसैनिक अभ्यास की घोषणा की है। इस पर अमेरिकी सेना के केंद्रीय कमान ने ईरानी सेना को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वह अमेरिकी युद्धपोतों के ऊपर से उड़ान भरने जैसे असुरक्षित युद्धाभ्यास को बर्दाश्त नहीं करेगा, जिसमें अमेरिकी जहाजों से टक्कर की दिशा में ईरानी स्पीडबोटों का आना भी शामिल है।
यह भी पढ़ें - US-Israel Deal: ईरान पर दोहरा वार करने की तैयारी में अमेरिका, इस्राइल में पहुंचाएगा उन्नत हथियारों की खेप
बातचीत के लिए तैयार है ईरान- अराघची
वहीं इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश निष्पक्ष और न्यायसंगत बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने ट्रंप की मुख्य मांगों को खारिज कर दिया। अराघची ने कहा कि रक्षा रणनीतियां और मिसाइल प्रणालियां कभी भी बातचीत का विषय नहीं होंगी।
ईरान का दावा- पहले से ज्यादा मजबूत हुई सैन्य क्षमताएं
ईरान की तरफ से ये भी दावा किया गया है कि हाल ही में हुए 12-दिवसीय युद्ध से उसकी सैन्य क्षमताएं पहले से ज्यादा मजबूत हुई हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, सेना प्रमुख अमीर हातमी ने एक सैन्य समारोह में कहा कि इस संघर्ष से ईरानी सेना को अपनी ताकत और कमजोरियों को समझने का मौका मिला, साथ ही विरोधी पक्ष की रणनीति को भी बेहतर ढंग से परखा गया। हातमी के अनुसार, इस युद्ध के बाद ईरान की मिसाइल प्रणाली, हवाई रक्षा और समग्र सैन्य क्षमता पहले से बेहतर और मजबूत स्थिति में है। उन्होंने इसे ईरान के लिए अनूठा अनुभव बताया, जिससे भविष्य में किसी भी हमले से निपटने की तैयारी और पुख्ता हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?
ईरान जल्द ही जिन नौसैनिक अभ्यासों की तैयारी कर रहा है, उनका केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य माना जा रहा है। यह संकरा जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। इस जलडमरूमध्य से होकर बड़ी मात्रा में तेल और गैस दुनिया भर में जाती है, ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल होने के बावजूद, इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है, अमेरिका के ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, यहां से गुजरने वाले अधिकतर तेल-गैस के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है। इसका बड़ा हिस्सा एशियाई देशों को सप्लाई होता है पिछले साल जून में इस्राइल की तरफ से ईरान पर किए गए 12-दिवसीय हमले के दौरान इस मार्ग को लेकर तनाव बढ़ा था, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी असर पड़ा।
यह भी पढ़ें - Epstein Files: इस्राइल के दबाव में थे डोनाल्ड ट्रंप? एपस्टीन फाइल के दावों ने मचाई सनसनी; इस शख्स का बताया दखल
ईरान की चेतावनी- पूरी ताकत से दिया जाएगा जवाब
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और सर्वोच्च नेता के सलाहकार अली शमखानी ने कहा है कि किसी भी दुश्मन कार्रवाई का प्रभावी और डर पैदा करने वाला जवाब दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि ईरान सिर्फ समुद्र तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक और उन्नत सैन्य विकल्पों के लिए पूरी तरह तैयार है। शमखानी ने कहा कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने का मतलब यह नहीं कि अमेरिका को यहां बढ़त मिल गई है। उन्होंने कहा, 'यह हमारा क्षेत्र है, इसकी भौगोलिक स्थिति और ताकत को हम किसी भी बाहरी शक्ति से बेहतर जानते हैं।'
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बातचीत के लिए तैयार है ईरान- अराघची
वहीं इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश निष्पक्ष और न्यायसंगत बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने ट्रंप की मुख्य मांगों को खारिज कर दिया। अराघची ने कहा कि रक्षा रणनीतियां और मिसाइल प्रणालियां कभी भी बातचीत का विषय नहीं होंगी।
ईरान का दावा- पहले से ज्यादा मजबूत हुई सैन्य क्षमताएं
ईरान की तरफ से ये भी दावा किया गया है कि हाल ही में हुए 12-दिवसीय युद्ध से उसकी सैन्य क्षमताएं पहले से ज्यादा मजबूत हुई हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, सेना प्रमुख अमीर हातमी ने एक सैन्य समारोह में कहा कि इस संघर्ष से ईरानी सेना को अपनी ताकत और कमजोरियों को समझने का मौका मिला, साथ ही विरोधी पक्ष की रणनीति को भी बेहतर ढंग से परखा गया। हातमी के अनुसार, इस युद्ध के बाद ईरान की मिसाइल प्रणाली, हवाई रक्षा और समग्र सैन्य क्षमता पहले से बेहतर और मजबूत स्थिति में है। उन्होंने इसे ईरान के लिए अनूठा अनुभव बताया, जिससे भविष्य में किसी भी हमले से निपटने की तैयारी और पुख्ता हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?
ईरान जल्द ही जिन नौसैनिक अभ्यासों की तैयारी कर रहा है, उनका केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य माना जा रहा है। यह संकरा जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। इस जलडमरूमध्य से होकर बड़ी मात्रा में तेल और गैस दुनिया भर में जाती है, ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल होने के बावजूद, इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है, अमेरिका के ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, यहां से गुजरने वाले अधिकतर तेल-गैस के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है। इसका बड़ा हिस्सा एशियाई देशों को सप्लाई होता है पिछले साल जून में इस्राइल की तरफ से ईरान पर किए गए 12-दिवसीय हमले के दौरान इस मार्ग को लेकर तनाव बढ़ा था, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी असर पड़ा।
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ईरान की चेतावनी- पूरी ताकत से दिया जाएगा जवाब
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और सर्वोच्च नेता के सलाहकार अली शमखानी ने कहा है कि किसी भी दुश्मन कार्रवाई का प्रभावी और डर पैदा करने वाला जवाब दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि ईरान सिर्फ समुद्र तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक और उन्नत सैन्य विकल्पों के लिए पूरी तरह तैयार है। शमखानी ने कहा कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने का मतलब यह नहीं कि अमेरिका को यहां बढ़त मिल गई है। उन्होंने कहा, 'यह हमारा क्षेत्र है, इसकी भौगोलिक स्थिति और ताकत को हम किसी भी बाहरी शक्ति से बेहतर जानते हैं।'
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