WEF: 'अगले पांच साल भी तेज रफ्तार से दौड़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था', जानें दावोस में मंत्री वैष्णव ने क्या कहा
Ashwini Vaishnaw In Davos: दावोस में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भरोसा जताया कि भारत अगले पांच साल तक छह से आठ प्रतिशत की तेज रफ्तार से बढ़ता रहेगा। टेलीकॉम सुधार, आसान अनुमतियां और निवेश के अनुकूल माहौल को उन्होंने ग्रोथ का आधार बताया। आइए जानते हैं वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में मंत्री वैष्णव ने क्या कुछ कहा है।
विस्तार
दावोस से भारत की आर्थिक तस्वीर साफ होती दिख रही है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत अगले पांच वर्षों में वास्तविक (रियल टर्म्स) में छह से आठ प्रतिशत और नाममात्र (नॉमिनल) आधार पर 10 से 13 प्रतिशत की दर से बढ़ता रहेगा। उन्होंने यह भरोसा मध्यम महंगाई, मजबूत घरेलू मांग और संरचनात्मक सुधारों के आधार पर जताया। यह बयान वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक के दौरान दावोस में दिया गया।
दावोस में क्या बोले वैष्णव?
बेट ऑन इंडिया-बैंक ऑन द फ्यूचर सत्र में बोलते हुए वैष्णव ने कहा कि भारत की ग्रोथ का इंजन केवल सरकारी खर्च नहीं, बल्कि निजी निवेश, टेक्नोलॉजी और नीतिगत सुधार हैं। यह सत्र भारतीय उद्योग परिसंघ और ईवाई के सहयोग से आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि अनुमतियों के सरलीकरण से निवेश का रास्ता आसान हुआ है और यही तेज विकास का आधार बनेगा।
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टेलीकॉम और प्रशासनिक सुधार कैसे बने बढ़त का आधार?
वैष्णव ने उदाहरण देते हुए कहा कि टेलीकॉम टावर लगाने का औसत समय 270 दिन से घटकर सिर्फ सात दिन रह गया है। उन्होंने यह भी कहा कि 89 प्रतिशत अनुमतियां अब जीरो टाइम में मिल रही हैं। उनका जोर इस बात पर रहा कि नीति का इरादा और जमीनी अमल, दोनों के बीच की दूरी कम करनी होगी, ताकि नौकरशाही राजनीतिक इच्छाशक्ति के अनुरूप काम करे।
उद्योग और डेटा नीति पर क्या अहम बातें रहीं?
- उद्योग जगत के बीच चुनौतियों पर खुला संवाद जरूरी बताया गया।
- डेटा लोकलाइजेशन नियमों के मानकीकरण पर अमेरिका और यूरोप के साथ तालमेल की बात कही गई।
- निवेश के लिए स्पष्ट और एकरूप नियमों को समय की मांग बताया गया।
- टेक्नोलॉजी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ग्रोथ का प्रमुख चालक माना गया।
2047 तक आय पांच गुना करने का लक्ष्य क्यों अहम?
सीआईआई अध्यक्ष राजीव मेमानी ने कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति आय अभी कम है और 2047 तक इसे कम से कम पांच गुना करना होगा। इसके लिए व्यापार संबंधों का विविधीकरण जरूरी है। उन्होंने मिडिल ईस्ट, एशिया पैसिफिक और यूनाइटेड किंगडम के साथ समझौतों को भविष्य की जरूरत बताया। घरेलू स्तर पर श्रम सुधार और जीएसटी जैसे कदमों से उपभोक्ता खाद्य उत्पादों पर कर कम हुए हैं, जिससे मांग बढ़ी है।
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वैश्विक अनिश्चितता में भारत क्यों दिख रहा स्थिर?
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था जब अनिश्चितता, बिखराव और तेज तकनीकी बदलाव से गुजर रही है, तब भारत स्थिरता और दीर्घकालिक अवसर का बड़ा बाजार बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि भारत का स्केल, सुधार और जनसांख्यिकी उसे अलग बनाते हैं।
इस गोलमेज बैठक में बैंकिंग, बीमा, टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, हेल्थ, केमिकल्स, कंज्यूमर गुड्स, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों के वैश्विक प्रतिनिधि मौजूद थे। भारत का संदेश साफ था कि भारत सिर्फ उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि आने वाले दशक का ग्रोथ हब है।
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