Trump In Davos: स्विट्जरलैंड के दावोस पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में लेंगे हिस्सा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्विट्ज़रलैंड पहुंचकर दावोस में विश्व नेताओं से मुलाकात करेंगे। वहीं, ट्रंप प्रशासन ने चागोस द्वीप समझौते को लेकर ब्रिटेन पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे से जुड़ा फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और इस पर कोई समझौता नहीं होगा।
विस्तार
#WATCH | US President Donald Trump arrives in Davos, Switzerland, to attend World Economic Forum 2026.
विज्ञापनविज्ञापन
(Video Source: US Network Pool/Reuters) pic.twitter.com/m1uaussrBc — ANI (@ANI) January 21, 2026
दावोस पहुंचते ही कूटनीतिक हलचल क्यों बढ़ी?
अमेरिकी राष्ट्रपति का विमान एयर फोर्स वन ज्यूरिख में उतरा। इसके बाद वह दावोस रवाना हुए, जहां उनका कार्यक्रम पहले कारोबार जगत के नेताओं से मुलाकात और फिर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भाषण देने का है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब यूक्रेन युद्ध, वैश्विक मंदी और सुरक्षा मुद्दों पर दुनिया की निगाहें अमेरिका की भूमिका पर टिकी हैं।
इन मुद्दो पर बोल सकते हैं ट्रंप
- दावोस में ट्रंप का भाषण घरेलू मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। इसमें महंगाई, आम लोगों की क्रयशक्ति और जीवन-यापन की लागत पर जोर होगा। साथ ही ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की रणनीति और वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम का जिक्र भी संभव है। विदेशी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों का भी कार्यक्रम है।
- ट्रंप ने ग्रीनलैंड मुद्दे पर डेनमार्क समेत यूरोपीय सहयोगियों पर 10 से 25 प्रतिशत टैरिफ की धमकी दी है। इससे बाजारों में गिरावट आई और अमेरिका-यूरोप रिश्तों में तनाव बढ़ा। यूरोपीय नेताओं ने सख्त जवाब की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता गहराई है।
- दावोस में ट्रंप आवास को सस्ता बनाने और महंगाई घटाने पर बात करेंगे। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ नीति से ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, जिससे घर और महंगे होंगे। अमेरिका में घरों की बिक्री 30 साल के निचले स्तर पर है, जो सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।
- ट्रंप दावोस में बोर्ड ऑफ पीस को आगे बढ़ाने की योजना पेश करेंगे, जो इस्राइल-हमास युद्धविराम की निगरानी करेगा। करीब 30 देशों के शामिल होने की उम्मीद है, लेकिन कई बड़े यूरोपीय देश दूरी बनाए हुए हैं। ट्रंप ने कहा कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र को चुनौती दे सकती है।
ये भी पढ़ें- 'अगले पांच साल भी तेज रफ्तार से दौड़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था', जानें दावोस में मंत्री वैष्णव ने क्या कहा
ब्रिटेन पर अमेरिका की नाराजगी क्या है?
इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने का ब्रिटेन का फैसला अमेरिका को निराश कर रहा है। उनका कहना है कि गार्सिया में मौजूद संयुक्त अमेरिका-ब्रिटेन सैन्य अड्डा दोनों देशों की साझा सुरक्षा का अहम आधार रहा है। अमेरिका का मानना है कि इस फैसले से रणनीतिक हित कमजोर हो सकते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर ट्रंप प्रशासन का रुख
- ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपनी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय सुरक्षा किसी अन्य देश के भरोसे नहीं छोड़ेगा।
- ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप इस मुद्दे पर बिल्कुल स्पष्ट और सख्त हैं।
- डिएगो गार्सिया का सैन्य अड्डा दशकों से अमेरिका और ब्रिटेन की साझा सुरक्षा का अहम आधार रहा है।
- ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस सैन्य अड्डे को किसी तीसरे पक्ष को सौंपना एक गंभीर रणनीतिक चूक होगी।
- अमेरिका ने संकेत दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ये भी पढ़ें- दक्षिण कोरिया के पूर्व पीएम को 23 साल की सजा, अदालत ने मार्शल लॉ लगाने को करार दिया विद्रोह
ब्रिटेन का पक्ष और समझौते की शर्तें क्या हैं?
ब्रिटेन सरकार का कहना है कि अदालतों के कुछ फैसलों से चागोस द्वीप पर उसका दावा कमजोर पड़ रहा था। इसी वजह से मॉरीशस के साथ समझौता कर सैन्य अड्डे की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। समझौते के तहत ब्रिटेन 99 वर्षों के लिए डिएगो गार्सिया के सैन्य अड्डे को लीज पर रखेगा, जिसे आगे 40 साल तक बढ़ाने का विकल्प भी होगा। लंदन का दावा है कि इससे संयुक्त अमेरिका-ब्रिटेन सैन्य ठिकाने का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
अन्य वीडियो-