{"_id":"6a6f6b778186ebf935022a11","slug":"attacks-on-russian-oil-refineries-and-airbases-zelenskyy-says-war-has-returned-to-where-it-began-2026-08-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Russia-Ukraine War: रूस के ऑयल रिफाइनरी और एयरबेस पर हमला; जेलेंस्की बोले- 'युद्ध वहीं लौटा, जहां से शुरू हुआ'","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Russia-Ukraine War: रूस के ऑयल रिफाइनरी और एयरबेस पर हमला; जेलेंस्की बोले- 'युद्ध वहीं लौटा, जहां से शुरू हुआ'
Sun, 02 Aug 2026 09:39 PM IST
प्रशांत तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Sun, 02 Aug 2026 09:39 PM IST
सार
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि यूक्रेनी सेना ने रूस के भीतर 600 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित रणनीतिक सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि रूस ने पिछले एक सप्ताह में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर ड्रोन, मिसाइल और बम हमले किए।
विज्ञापन
वोलोदिमिर जेलेंस्की
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रविवार को दावा किया कि यूक्रेनी सेना ने रूस के सैन्य और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर लंबी दूरी से सटीक हमले किए हैं। उनके अनुसार, इन हमलों में सारातोव ऑयल रिफाइनरी और एंगेल्स सैन्य एयरबेस को निशाना बनाया गया। जेलेंस्की ने कहा कि इन अभियानों का उद्देश्य रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करना है।
विज्ञापन
रूस के किन रणनीतिक ठिकानों को बनाया गया निशाना?
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यूक्रेनी बलों ने रूस के भीतर गहराई में स्थित कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला किया। उन्होंने कहा, 'बीती रात रूस के सारातोव में, जो अग्रिम मोर्चे से 600 किलोमीटर से अधिक दूर है, दो रणनीतिक ठिकानों सारातोव ऑयल रिफाइनरी और एंगेल्स सैन्य एयरबेस पर सफलतापूर्वक हमला किया गया।'
विज्ञापन
क्या अन्य ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाया गया?
जेलेंस्की ने बताया कि कालुगा क्षेत्र में स्थित ल्युदिनोव्स्काया ऑयल डिपो के ईंधन भंडारण परिसर पर भी हमला किया गया। इसके अलावा, ब्रायंस्क क्षेत्र में उस स्थान पर सटीक प्रहार किया गया, जहां कथित तौर पर हमलावर ड्रोन को संग्रहीत, तैयार और लॉन्च किया जाता था।
विज्ञापन
लंबी दूरी की हमलावर क्षमता पर जेलेंस्की ने क्या कहा?
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने रक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि देश लगातार अपनी लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन अब 'युद्ध को वहीं वापस ले जा रहा है, जहां से इसकी शुरुआत हुई थी।'
रूस ने पिछले सप्ताह यूक्रेन पर कितने हमले किए?
एक अन्य पोस्ट में जेलेंस्की ने दावा किया कि पिछले एक सप्ताह के दौरान रूस ने यूक्रेन के 16 क्षेत्रों को निशाना बनाया। उनके अनुसार, इस अवधि में रूस ने करीब 1,900 ड्रोन, 1,600 हवाई बम और 144 विभिन्न प्रकार की मिसाइलें, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइलें भी शामिल हैं, दागीं।
किन इलाकों में सबसे ज्यादा तबाही हुई?
जेलेंस्की ने बताया कि पूर्वोत्तर के सूमी क्षेत्र पर हवाई बम गिराए गए, जबकि ब्रोवारी में ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और छह लोग घायल हुए। इसके अलावा खार्किव और उसके आसपास के इलाके लगातार हमलों की चपेट में रहे। रात के दौरान ओडेसा, ज़ापोरिज्जिया और ड्नीप्रो क्षेत्रों पर भी हमले किए गए।
हमलों में कितना नुकसान होने का दावा किया गया?
जेलेंस्की के अनुसार, पिछले सप्ताह हुए हमलों में 1,500 से अधिक स्थानों को नुकसान पहुंचा, जिनमें सैकड़ों रिहायशी इमारतें भी शामिल हैं।
रूस पर और कड़े प्रतिबंधों की मांग क्यों की गई?
जेलेंस्की ने कहा कि रूस की रक्षा उत्पादन प्रणाली से जुड़ी कई कंपनियां अब भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे से बाहर हैं। उनके मुताबिक, ड्रोन, मिसाइल और गाइडेड बमों के पुर्जे बनाने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि रूस के रक्षा-औद्योगिक तंत्र के हर हिस्से पर दबाव बनाया जाना चाहिए। यही दबाव हमारे लोगों पर होने वाले हमलों को कम करने में मदद करेगा। प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए और उनका प्रभावी तरीके से पालन भी होना चाहिए।
पश्चिमी देशों से पैट्रियट मिसाइलों की मांग क्यों की गई?
इस बीच शनिवार को जेलेंस्की ने पश्चिमी सहयोगियों से तत्काल पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलें उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने वाली ये मिसाइलें गोदामों में रखने के बजाय लोगों की जान बचाने के लिए इस्तेमाल होनी चाहिए।
रूस के हालिया बड़े हवाई हमले में क्या हुआ?
जेलेंस्की के अनुसार, रूस ने हाल ही में 35 मिसाइलों, जिनमें अधिकांश बैलिस्टिक थीं, और करीब 190 ड्रोन के साथ बड़ा हवाई हमला किया। इन हमलों का मुख्य निशाना राजधानी कीव और उसके आसपास के ब्रोवारी तथा विश्नेवे जैसे इलाके रहे। केवल कीव क्षेत्र में ही कम से कम 9 लोगों की मौत हुई और 40 लोग घायल हुए।
अमेरिका और यूरोप से जेलेंस्की ने क्या अपील की?
जेलेंस्की ने कहा कि अब अमेरिका और यूरोपीय देशों को राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए आवश्यक रक्षा सहायता तुरंत उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में पैट्रियट मिसाइलें मौजूद हैं। अब जरूरत इस बात की है कि हमारे साझेदार उन्हें उपलब्ध कराने का राजनीतिक फैसला लें। अमेरिका जानता है कि हमें क्या चाहिए और यूरोप भी इससे भली-भांति परिचित है। बैलिस्टिक रोधी मिसाइलों का इस्तेमाल लोगों की सुरक्षा के लिए होना चाहिए, न कि उन्हें भंडारगृहों में रखा जाए। हर दिन की देरी रूस को हमारे लोगों की जान लेने का एक और अवसर देती है।
रूस की नई युद्ध रणनीति को लेकर क्या चेतावनी दी गई?
जेलेंस्की ने कहा कि रूस अब जेट इंजन से लैस 'शाहेद' ड्रोन का अधिक इस्तेमाल कर रहा है। उनका कहना था कि युद्ध जितना लंबा खिंचेगा, रूस उतनी ही नई सैन्य रणनीतियां विकसित करेगा, जो भविष्य में केवल यूक्रेन ही नहीं बल्कि व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती हैं।
अन्य क्षेत्रों में हालात कैसे रहे?
जेलेंस्की ने बताया कि खेरसॉन, मिकोलाइव, निकोपोल और मारहानेत्स में लगातार एफपीवी ड्रोन हमले और गोलाबारी जारी रही। वहीं ओडेसा में एक अपार्टमेंट इमारत क्षतिग्रस्त हुई, जबकि ज़ापोरिज्जिया, डोनेट्स्क और सूमी के कई समुदायों पर भी हमले हुए, जिनमें दर्जनों लोग घायल हुए।
ये भी पढ़ें: Pakistan: पाकिस्तान में शांति रैली के दौरान धमाका; सात लोगों की मौत, 18 गंभीर घायल; आत्मघाती हमले की आशंका
रूस के ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाने की मांग क्यों दोहराई गई?
जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों, लॉन्चरों और उनके पुर्जों के निर्माण से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि जी-7 देशों में प्रतिबंधों के पालन में अब भी कई खामियां हैं। साथ ही उन्होंने रूस की तेल रिफाइनिंग क्षमता और ईंधन आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क पर भी सख्त कार्रवाई की अपील की, ताकि मॉस्को की युद्ध क्षमता को कमजोर किया जा सके।