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Pakistan: यूएस राष्ट्रपति ट्रंप के सामने उठा पाकिस्तान की ज्यादती का मामला, महरंग बलोच को उम्रकैद पर नाराजगी
पीटीआई, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 24 Jun 2026 11:58 AM IST
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सार
बलोच कार्यकर्ता महरंग बलोच को उम्रकैद देने के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घिरता दिख रहा है। बलोच कार्यकर्ताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है और संयुक्त राष्ट्र में भी ये मुद्दा उठा है।
महरंग बलोच
- फोटो : आईएएनएस
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विस्तार
बलोच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर बलोच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता महरंग बलोच को सुनाई गई उम्रकैद की सजा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधी अदालत ने सोमवार को महरंग बलोच समेत चार कार्यकर्ताओं को फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति से की ये अपील
राष्ट्रपति ट्रंप को संबोधित पत्र में तारा चंद ने लिखा, 'महरंग बलोच ने अपना जीवन बलोचिस्तान में जबरन गायब किए गए लोगों, पुलिस हिरासत में हत्याओं और मानवाधिकार उल्लंघनों के मुद्दों को शांतिपूर्ण ढंग से उठाने के लिए समर्पित किया है। वह एक साल से अधिक समय से जेल में हैं और अब उन्हें पाकिस्तानी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। हमारा मानना है कि यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अधिकारों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है।'
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद बलोचिस्तान के लोग गरीबी, राजनीतिक दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं, जबकि न्याय की मांग करने वाले लोगों को धमकियों और जेल का सामना करना पड़ता है। तारा चंद ने अमेरिकी सरकार से महरंग बलोच के मामले की बारीकी से निगरानी करने, उनकी अपील के अधिकार का समर्थन करने तथा पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों और कानून का पालन करने के लिए दबाव बनाने का आग्रह किया।
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मानवाधिकार संगठनों ने भी जताई चिंता
कई प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने भी अदालत के फैसले की आलोचना की है और इसे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन तथा न्याय का खुला हनन बताया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया के लिए कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासे ने कहा, 'यह फैसला निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का अपमान है और दिखाता है कि पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण असहमति को दबाने के लिए किया जा रहा है। महरंग बलोच और शाह जी को कथित हिंसा से जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं है।'
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने भी फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह न्याय नहीं, बल्कि असहमति की आवाजों और मानवाधिकार रक्षकों को डराने के लिए न्यायिक प्रणाली का राजनीतिक इस्तेमाल है। बयान में कहा, 'यह फैसला न्याय का घोर दुरुपयोग और पाकिस्तान में कानून के शासन के लिए गंभीर झटका है। बीवाईसी की नेता डॉ. महरंग बलोच बलोचिस्तान में जबरन गुमशुदगी, न्यायेतर हत्याओं और राज्य दमन के खिलाफ शांतिपूर्ण और साहसिक आवाज रही हैं।'
संयुक्त राष्ट्र में भी पहुंचा मामला
उधर, बलोच नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष नसीम बलोच के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र के कई विशेष प्रतिवेदकों (स्पेशल रैपोर्टियर्स) से मुलाकात कर बलोचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा किए जा रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाया। बीएनएम ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने महरंग बलोच, सिबगतुल्लाह शाह जी बलोच और अन्य लोगों को कथित रूप से मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर उम्रकैद की सजा दिए जाने तथा निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलने संबंधी चिंताओं को भी संयुक्त राष्ट्र के समक्ष रखा।
अमेरिकी राष्ट्रपति से की ये अपील
राष्ट्रपति ट्रंप को संबोधित पत्र में तारा चंद ने लिखा, 'महरंग बलोच ने अपना जीवन बलोचिस्तान में जबरन गायब किए गए लोगों, पुलिस हिरासत में हत्याओं और मानवाधिकार उल्लंघनों के मुद्दों को शांतिपूर्ण ढंग से उठाने के लिए समर्पित किया है। वह एक साल से अधिक समय से जेल में हैं और अब उन्हें पाकिस्तानी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। हमारा मानना है कि यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अधिकारों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है।'
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उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद बलोचिस्तान के लोग गरीबी, राजनीतिक दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं, जबकि न्याय की मांग करने वाले लोगों को धमकियों और जेल का सामना करना पड़ता है। तारा चंद ने अमेरिकी सरकार से महरंग बलोच के मामले की बारीकी से निगरानी करने, उनकी अपील के अधिकार का समर्थन करने तथा पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों और कानून का पालन करने के लिए दबाव बनाने का आग्रह किया।
मानवाधिकार संगठनों ने भी जताई चिंता
कई प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने भी अदालत के फैसले की आलोचना की है और इसे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन तथा न्याय का खुला हनन बताया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया के लिए कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासे ने कहा, 'यह फैसला निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का अपमान है और दिखाता है कि पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण असहमति को दबाने के लिए किया जा रहा है। महरंग बलोच और शाह जी को कथित हिंसा से जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं है।'
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने भी फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह न्याय नहीं, बल्कि असहमति की आवाजों और मानवाधिकार रक्षकों को डराने के लिए न्यायिक प्रणाली का राजनीतिक इस्तेमाल है। बयान में कहा, 'यह फैसला न्याय का घोर दुरुपयोग और पाकिस्तान में कानून के शासन के लिए गंभीर झटका है। बीवाईसी की नेता डॉ. महरंग बलोच बलोचिस्तान में जबरन गुमशुदगी, न्यायेतर हत्याओं और राज्य दमन के खिलाफ शांतिपूर्ण और साहसिक आवाज रही हैं।'
संयुक्त राष्ट्र में भी पहुंचा मामला
उधर, बलोच नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष नसीम बलोच के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र के कई विशेष प्रतिवेदकों (स्पेशल रैपोर्टियर्स) से मुलाकात कर बलोचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा किए जा रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाया। बीएनएम ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने महरंग बलोच, सिबगतुल्लाह शाह जी बलोच और अन्य लोगों को कथित रूप से मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर उम्रकैद की सजा दिए जाने तथा निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलने संबंधी चिंताओं को भी संयुक्त राष्ट्र के समक्ष रखा।