बांग्लादेश की एक अदालत ने सोमवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और 285 अन्य लोगों के खिलाफ देशद्रोह के मामले में आरोप तय करने के लिए 21 जनवरी की तारीख तय की है।
स्थानीय न्यूज पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि हसीना और अवामी लीग के सैकड़ों सदस्यों ने दिसंबर 2024 में 'जॉय बांग्ला ब्रिगेड' नाम के एक ग्रुप की वर्चुअल मीटिंग में हिस्सा लिया था, जिसके दौरान उन्होंने कथित तौर पर मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को गिराने की साजिश रची थी।
अंतरिम सरकार गिराने की साजिश
बताया गया है कि ‘जॉय बांग्ला ब्रिगेड’ अवामी लीग और शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान की विरासत का समर्थक समूह है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी मंच के जरिए मौजूदा अंतरिम सरकार के खिलाफ रणनीति बनाई गई। उस समय बांग्लादेश में सत्ता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के हाथों में थी।
चार्जशीट से वारंट तक...
यह मामला मार्च 2025 में आपराधिक जांच विभाग ने दर्ज किया था। 30 जुलाई को 286 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। अदालत ने 14 अगस्त को इसे स्वीकार कर सभी आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए। इसके बाद 11 सितंबर को यात्रा पर रोक लगाई गई और 14 अक्टूबर को फरार आरोपियों को अदालत में पेश होने के लिए अखबारों में नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया।
देश छोड़ने के बाद की स्थिति
शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को देशव्यापी छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके तीन दिन बाद, 8 अगस्त को मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली। नवंबर 2025 में एक विशेष ट्रिब्यूनल ने छात्र आंदोलन के दौरान कथित दमन को लेकर हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध में अनुपस्थिति में मौत की सजा भी सुनाई थी।
21 जनवरी पर टिकी नजर
अब 21 जनवरी को अदालत में आरोप तय होने हैं, जिसके बाद इस मामले में नियमित सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। बांग्लादेश की राजनीति और कानून व्यवस्था के लिहाज से यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें देश की पूर्व प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ दल के सैकड़ों नेता आरोपी हैं।
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