सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Bangladesh Election Results 2026 tarique rahman BNP party wins parliamentary elections Sheikh Hasina Jamaat

Bangladesh Election Results 2026: बांग्लादेश की सत्ता में BNP की वापसी, बहुमत का आंकड़ा पार; जमात का बुरा हाल

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 13 Feb 2026 05:42 AM IST
विज्ञापन
सार

BNP Wins Elections: बांग्लादेश चुनाव 2026 में बीएनपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी दल काफी पीछे हैं। मतगणना के रुझानों में बीएनपी गठबंधन स्पष्ट बढ़त पर है। तारिक रहमान की जीत के साथ उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता मजबूत माना जा रहा है।

Bangladesh Election Results 2026 tarique rahman BNP party wins parliamentary elections Sheikh Hasina Jamaat
तारिक रहमान - फोटो : बीएनपी.ऑर्गेनाइजेशन
विज्ञापन

विस्तार

बांग्लादेश के आम चुनाव में सियासी तस्वीर तेजी से बदलती दिख रही है। देश में जनता ने कट्टरपंथियों की जमात को पूरी तरह नकार दिया है। भारत विरोधी रवैया रखने वाली जमात-ए-इस्लामी और उसके नेतृत्व वाला 11 दलों का गठजोड़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से पूरी तरह से हारता दिख रहा है। देश में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत बेगम खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी करीब 20 साल के बाद सरकार बना सकती है। रॉयटर्स के अनुसार बांग्लादेश के चुनावी नतीजों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी ने बहुमत हासिल कर लिया है। वहीं, कट्टरपंथी दलों को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। 
Trending Videos

 

बांग्लादेशी मीडिया ढाका ट्रिब्यून के अनुसार मतगणना में बीएनपी ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है और अब तक 151 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है। शुरुआती रुझान बताते हैं कि जमात-ए-इस्लामी 43 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभर रही है। जबकि इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश को एक सीट और अन्य दलों को अबतक चार सीटें मिली हैं। इन रुझानों से संकेत मिल रहा है कि बीएनपी गठबंधन मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है। ऐसे में तारिक रहमान की ताजपोशी पक्की मानी जा रही है।

बीएनपी जीती तो कौन बनेगा प्रधानमंत्री? 
शुरुआती अनौपचारिक नतीजों के अनुसार 299 में से 204 सीटों की गिनती पूरी होने तक बीएनपी 158 सीटों पर आगे या जीत दर्ज कर चुकी थी, जबकि जमात-ए-इस्लामी 41 और अन्य दल पांच सीटों पर रहे। बीएनपी प्रमुख बेगम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने बोगरा सीट से 2,16,284 वोट पाकर जीत हासिल की। बीएनपी पहले ही साफ कर चुकी है कि सत्ता मिलने पर तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा

बीएनपी प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत बेगम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6 सीट से जीत दर्ज की है। अगर अंतिम नतीजे इसी रुझान पर रहे तो उनका अगला प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा है। बेगम खालिदा जिया 2001 से 2006 तक प्रधानमंत्री रहीं। चुनाव प्रचार के दौरान तारिक रहमान ने अवामी लीग के समर्थकों से भी समर्थन की अपील की थी। रुझानों से संकेत मिला है कि अवामी लीग के कई पारंपरिक वोट इस बार बीएनपी की ओर गए।

ये भी पढ़ें- भारत के लिए कितने अहम बांग्लादेश के चुनाव: नतीजों से कैसे पड़ सकता है प्रभाव, किस पार्टी का क्या रुख?

मतदान के दौरान हिंसा और धमाके की घटनाएं
मतदान के दिन कई इलाकों से हिंसा और झड़प की खबरें आईं। खुलना में एक मतदान केंद्र के बाहर जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं और बीएनपी समर्थकों के बीच भिड़ंत में एक बीएनपी नेता की मौत हो गई। बीएनपी का आरोप है कि धक्का दिए जाने से वह पेड़ से टकराए और जान गई। जमात ने दावा किया कि नेता पहले से बीमार थे। गोपालगंज के निचुपाड़ा स्थित रेशमा इंटरनेशनल स्कूल मतदान केंद्र पर सुबह करीब 9 बजे हैंडबम हमला हुआ, जिसमें 13 साल की लड़की समेत तीन लोग घायल हुए। चुनाव ड्यूटी में लगे अंसार बल के दो सदस्य भी घायल हुए।

जनमत संग्रह में सुधारों को समर्थन
चुनाव के साथ अंतरिम सरकार की ओर से संवैधानिक सुधारों पर जनमत संग्रह भी कराया गया। इसमें करीब दो तिहाई मतदाताओं ने सुधारों के पक्ष में राय दी। यह जनमत संग्रह चुनावी प्रक्रिया के साथ ही आयोजित हुआ। इसे अंतरिम प्रशासन के एजेंडे का अहम हिस्सा बताया गया। अधिकारियों के अनुसार सुधारों का मकसद शासन व्यवस्था में बदलाव और संस्थागत ढांचे को मजबूत करना है।

शेख हसीना ने चुनाव पर उठाए सवाल
अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के तहत कराए गए चुनाव को सुनियोजित तमाशा बताया है। उन्होंने तटस्थ कार्यवाहक सरकार के तहत नए सिरे से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की। अवामी लीग इस चुनाव में अपने पारंपरिक चुनाव चिन्ह के बिना मैदान में रही। हसीना ने कहा कि उनकी पार्टी की गैरमौजूदगी में कराया गया मतदान लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और मतदाताओं के अधिकारों की अनदेखी है।

भारत ने क्यों पर्यवेक्षक नहीं भेजे?
भारत सरकार ने बताया कि उसे चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए पर्यवेक्षक भेजने का निमंत्रण मिला था, लेकिन हस्तक्षेप के आरोप से बचने के लिए पर्यवेक्षक नहीं भेजे गए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत चाहता है कि चुनाव की विश्वसनीयता का फैसला बांग्लादेश की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय करे। भारत ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के समर्थन की बात दोहराई।


संबंधित वीडियो-

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article